Nifty Flat Returns: अगर आप भी पिछले दो सालों से म्यूचुअल फंड में SIP कर रहे हैं, तो आपने निश्चित रूप से अपने पोर्टफोलियो को देखकर यह सोचा होगा कि बाजार में इतनी हलचल और रिकॉर्ड हाई के बावजूद आपका पैसा बढ़ क्यों नहीं रहा है?

Nifty Flat Returns: अगर आप भी पिछले दो सालों से म्यूचुअल फंड में SIP कर रहे हैं, तो आपने निश्चित रूप से अपने पोर्टफोलियो को देखकर यह सोचा होगा कि बाजार में इतनी हलचल और रिकॉर्ड हाई के बावजूद आपका पैसा बढ़ क्यों नहीं रहा है?
पिछले 2 सालों के दौरान बाजार ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई, बड़ी गिरावटें देखीं, जियोपॉलिटिकल तनाव भी झेला और भारी उतार-चढ़ाव का सामना किया। लेकिन इन तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी निफ्टी (Nifty) आज ठीक उसी जगह खड़ा है जहां वह दो साल पहले था। ऐसे में हर आम निवेशक के मन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या शेयर बाजार की रफ्तार अब पूरी तरह थम चुकी है?
Edelweiss म्यूचुअल फंड के एक हालिया विश्लेषण के मुताबिक, ऐसा बिल्कुल नहीं है। फंड हाउस ने इतिहास के उन पन्नों को पलटा है जब निफ्टी ने दो साल तक 'फ्लैट' यानी शून्य के बराबर रिटर्न दिया था। उसके बाद जो हुआ, वह हर परेशान निवेशक का हौसला बढ़ा सकता है। आइए पूरी डिटेल में समझते हैं बाजार का यह गणित।
एक ऐसी यात्रा जो जहां से शुरू हुई, वहीं खत्म हुई
पिछले दो साल का सफर निवेशकों के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
सितंबर 2024: निफ्टी ने करीब 26,277 का रिकॉर्ड हाई छुआ।
शुरुआती 2025: ग्लोबल टैरिफ को लेकर आई वैश्विक गिरावट के कारण बाजार तेजी से नीचे गिरा।
जनवरी 2026: बाजार ने शानदार रिकवरी की और 26,373 का नया लाइफ-टाइम हाई बना दिया।
मौजूदा स्थिति (मई-जून 2026): मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के चलते बाजार फिर फिसल गया।
Edelweiss इसे 'टू-ईयर राउंड ट्रिप' कहता है। यानी एक ऐसी गोल यात्रा, जहां 2024 की तेजी में एंट्री करने वाले निवेशकों का रिटर्न आज भारी उथल-पुथल के बाद भी फ्लैट या मामूली नेगेटिव है।
क्या कहता है इतिहास?
Edelweiss ने साल 2001 के बाद से ऐसे 11 मौकों का विश्लेषण किया जब निफ्टी ने लगातार दो साल तक कोई रिटर्न नहीं दिया था। इन सभी 11 मामलों में एक बेहद हैरान करने वाला और एक जैसा पैटर्न देखने को मिला:
नोट: हालांकि इतिहास खुद को हूबहू नहीं दोहराता और पुराना प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है, लेकिन डेटा गवाह है कि बाजार की लंबी सुस्ती के बाद हमेशा उम्मीद से कहीं बेहतर रिकवरी देखने को मिली है।
फ्लैट या सुस्त बाजार आखिर सेहत के लिए अच्छे क्यों होते हैं?
सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन बाजार को हमेशा नए रिकॉर्ड बनाने की जरूरत नहीं होती; कभी-कभी उसे ठहरने के लिए समय चाहिए होता है।
सीमित दायरे में रहने से कंपनियों की कमाई को शेयरों की बढ़ी हुई कीमतों के साथ तालमेल बिठाने का मौका मिल जाता है। इससे कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से वाजिब स्तर पर आ जाता है, जो भविष्य की एक मजबूत और टिकाऊ तेजी की नींव रखता है।
वैल्यूएशन की मौजूदा स्थिति
लार्ज-कैप (Large-cap): ये स्टॉक्स इस समय अपने 7 साल के औसत वैल्यूएशन से भी नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जो इन्हें आकर्षक बनाता है।
मिड-कैप (Mid-cap): इनका वैल्यूएशन मोटे तौर पर अपने लॉन्ग-टर्म औसत के पास आ चुका है।
स्मॉल-कैप (Small-cap): इस कैटगरी में अभी भी वैल्यूएशन थोड़ा महंगा बना हुआ है।
यह 2013 का 'टेपर टेंट्रम' दौर नहीं है!
कई निवेशक आज की बाजार की कमजोरी की तुलना साल 2013 के 'टेपर टेंट्रम' (Taper Tantrum) के दौर से कर रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार दोनों दौर में जमीन-आसमान का अंतर है:
2013 के समय भारत भारी महंगाई, बड़े चालू खाता घाटे, कंपनियों पर भारी कर्ज और बैंकों के ऊंचे एनपीए (NPA) से जूझ रहा था। आज 2026 में भारत की महंगाई दर काफी कम है, आर्थिक विकास मजबूत है, बैंकों के एनपीए ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं और कॉरपोरेट बैलेंस शीट बेहद मजबूत है।
हालांकि, बढ़ता हुआ सरकारी कर्ज, घरेलू स्तर पर बढ़ता कर्ज और कैपिटल अकाउंट सरप्लस का कम होना ऐसे रिस्क हैं, जिन पर नजर रखनी होगी।
सुर्खियां सुधरने से पहले ही दौड़ पड़ता है बाजार
इस स्टडी का सबसे बड़ा सबक निवेशकों के व्यवहार से जुड़ा है। साल 2020 के कोरोना काल को याद कीजिए। मार्च 2020 में बाजार ने अपना निचला स्तर छू लिया था, जबकि देश में कोरोना के मामले उसके कई महीनों बाद तक बढ़ते रहे। जब तक अखबारों और टीवी पर अच्छी खबरें आनी शुरू हुईं, तब तक बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका था।
बाजार हमेशा आगे की सोचता है। इतिहास गवाह है कि बाजार के 96% सबसे अच्छे और बड़े रिटर्न वाले दिन हमेशा किसी संकट या भारी अस्थिरता के दौरान ही आए हैं। अगर निवेशक डरकर इस सुस्ती के दौर में बाहर निकल जाता है, तो वह उन सबसे बेहतरीन दिनों को मिस कर देता है, जिससे उसका लॉन्ग-टर्म रिटर्न काफी कम हो जाता है।
बॉटम लाइन क्या है?
अगले कुछ महीनों में बाजार कहां जाएगा यह कोई नहीं जानता। मिडिल ईस्ट का तनाव, ब्याज दरें और कंपनियों के नतीजे अभी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित करते रहेंगे। लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि बाजार के जो दौर सबसे ज्यादा थकाते और परेशान करते हैं, वही आगे चलकर सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाले साबित होते हैं। यह वक्त घबराने का नहीं, बल्कि अपनी SIP को शांति से जारी रखने का है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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