Nifty Overvalued or Undervalued: घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 इस महीने की शुरुआत में 1 अगस्त 2024 को रिकॉर्ड हाई पर चला गया था और इसने 25 हजार का लेवल छू दिया। 1 अगस्त को यह 25 हजार के पार बंद भी हुआ था लेकिन फिर अगसे दिन से इसमें दबाव दिखा और इंट्रा-डे में भी इसने यह लेवल छुआ नहीं है। अब सवाल ये उठता है कि क्या मार्केट ओवरवैल्यूएड है? डॉलर के टर्म में देखें तो दुनिया भर में एक साल में सबसे बेहतर परफॉर्म करने मार्केट में भारतीय मार्केट भी शुमार है।
देश में यूनिक इनवेस्टर्स की संख्या 9 करोड़ से अधिक हो गई जो वर्ष 2020 में महज 3 करोड़ थी। हर महीने की एसआईपी भी 20 हजार करोड़ रुपये के लेवल को पार कर गई। इन सब रिकॉर्ड लेवल पर अब यह समझना बहुत जरूरी है कि मार्केट का वैल्यूएशन कैसा है?
PE रेश्यो से क्या मिल रहा संकेत?
वैल्यूएशन कैसा है, इसे लेकर आमतौर पर सबसे पहले प्राइस टू अर्निंग्स (PE) रेश्यो देखा जाता है। यह शेयर के भाव और प्रति शेयर आय का रेश्यो होता है। यह एक रेंज में ऊपर-नीचे होता है जिसके अधिक होने का मतलब वैल्यूएशन अधिक है और कम होने का मतलब अंडरवैल्यूएशन है। यहां नीचे जो ग्राफ है, इसमें वर्ष 2019 से निफ्टी 50 का डेटा है और हाई-लो वैल्यूएशन के बैंड के साथ पीई रेश्यो है।
यहां देख सकते हैं कि निफ्टी 50 का जो लेवल है, वह हाई तो है लेकिन अभी भी पीई रेश्यो के हिसाब से यह ओवरवैल्यूएड जोन में नहीं है। प्राइस बढ़ रहे हैं लेकिन साथ ही कमाई भी बढ़ रही है तो इसका मतलब है कि मार्केट अभी भी ओवरवैल्यूएड नहीं है।
सेक्टरवाइज क्या है स्थिति?
निफ्टी 50 के बाद अब देखें कि सेक्टरवाइज क्या स्थिति है और कौन-सा ओवरवैल्यूएड है, कौन-सा अंडरवैल्यूएड है। इससे पता चल सकेगा कि किस सेक्टर में ग्रोथ की अभी काफी गुंजाइश है। यहां नीचे अलग-अलग सेक्टर के लिए 5 साल के पीई रेश्यो दिए जा रहे हैं।
इस चार्ट में देख सकते हैं कि ऑटो, बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर 5 साल के औसत (मीन) के नीचे हैं जबकि कमोडिटीज, एनर्जी, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर 5 साल के औसत से अधिक हैं। हालांकि यहां यह जरूर ध्यान रखें कि वर्ष 2020 में पीई रेश्यो इतना तेज उछल गए थे कि उससे औसत थोड़ा ऊपर-नीचे हो गया है।