कोटक म्यूचुअल फंड के एमडी निलेश शाह का कहना है कि गिरावट थमने से इंडियन मार्केट्स ने राहत की सांस ली है। लेकिन, यह थोड़े समय की राहत हो सकती है। इंडियन मार्केट में कुछ समय तक उतारचढ़ाव जारी रहने के आसार हैं। मनीकंट्रोल की श्वेता पुंज से बातचीत में उन्होंने स्टॉक मार्केट और इनवेस्टमेंट को लेकर कई अहम बातें बताईं। उन्होंने यह भी बताया कि आज ज्यादातर इनवेस्टर्स पिछले प्रदर्शन के आधार पर निवेश के फैसले ले रहे हैं। वे तब खरीदते हैं जब कीमतें चढ़ रही होती हैं और बेचते हैं जब कीमतें गिर रही होती हैं।
पैसा बनाने के लिए मार्केट को समझना जरूरी है
शाह (Nilesh Shah) ने कहा कि पैसा बनाने का आसान सिद्धांत है कि आपको तब खरीदना है जब कीमतें गिर रही होती हैं और तब बेचना है जब कीमतें चढ़ रही होती हैं। लेकिन, इनवेस्टर्स इसके उलट करते हैं। फिर लॉस होने पर वे मार्केट को कोसते हैं। मार्केट्स को समझने के लिए पढ़ना जरूरी है। इसके लिए आपको समय देना पड़ेगा। अगर आपके पास ऐसी समझ नहीं है तो आप इनवेस्टमेंट एडवाइजर के पास जा सकते हैं।
नए निवेशक लॉस होते ही बेचैन हो जाते हैं
उन्होंने कहा कि इनवेस्टमेंट एडवाइजर आपके रिस्क प्रोफाइल और इनवेस्टमेंट गोल को समझने की कोशिश करेगा। फिर वह निवेश के लिए सिस्टमैटिक प्लान के बारे में बताएगा। जिन निवेशकों ने मार्केट को समझा है और पहले बड़ी गिरावट देख चुके हैं वे आज भी SIP से निवेश कर रहे हैं। दरअसल, वे हर गिरावट पर अपना निवेश बढ़ा रहे हैं। वे एकमुश्त निवेश कर रहे हैं या अपने सिप को टॉप-अप कर रहे हैं। दूसरी तरफ नए निवेशक जिन्हें बाजार की समझ नहीं है या मार्केट में नए हैं वे गिरावट पर बैचेन हो जाते हैं। पैसे की वैल्यू घटने पर उन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है।
म्यूचुअल फंड के निवेशकों को कम नुकसान
निवेशकों के लॉस के बारे में शाह ने कहा कि अच्छी बात यह है कि इस बार ज्यादा लॉस उन निवेशकों को हुआ है, जिन्होंने सीधे शेयरों में पैसे लगाए थे। म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को कम लॉस हुआ है। गिरावट के बीच म्यूचुअल फंडों की करीब हर कैटेगरी ने मार्केट से अच्छा प्रदर्शन किया है। दूसरी तरह सीधे शेयरों में निवेश करने वाले लोगों को मार्केट के मुकाबले ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह सीखने के लिहाज से अच्छा अनुभव है। कुछ लॉस के बाद ही अनुभव आता है।
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चीन साम दाम दंड भेद की पॉलिसी पर चल रहा
चीन के बारे में पूछने पर शाह ने कहा कि चीन ने विष्णुगुप्त, आचार्य चाणक्य से सीखा है। वह साम दाम दंड भेद की नीति अपना रहा है। हम चाणक्य को भूल गए हैं। इसलिए हमें कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। चीन में गूगल नहीं है, याहू नहीं है, फेसबुक नहीं है और एक्स नहीं है। इसके बावजूद कंपनियां चीन को बंद इकोनॉमी वाला देश नहीं मानती हैं। चीन का ट्रेड सरप्लस लाखों करोड़ डॉलर का है। जर्मनी और अमेरिका को छोड़ दुनिया में किसी देश का एक्सपोर्ट लाख करोड़ डॉलर का नहीं है। इसके बावजूद कंपनियां कहती हैं कि चीन एक खुली अर्थव्यवस्था वाला देश है।