शेयर बाजार पिछले कई महीनों से सीमित दायरे में चढ़ और उतर रहा है। बाजार पर अमेरिका-ईरान की लड़ाई और इस वजह से क्रूड ऑयल में उछाल का असर दिख रहा है। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू होने की उम्मीद नहीं दिख रही। इसका मतलब है कि बाजार पर दबाव बना रहेगा। ऐसे माहौल में निवेशकों को क्या करना चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल नीलेश शाह से पूछा। शाह कोटक महिंद्रा एएमसी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने स्टॉक मार्केट्स और इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है।
क्रूड की ऊंची कीमतों से जीडीपी ग्रोथ घट सकती है
शाह ने कहा कि मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। यह इकोनॉमी के लिए बड़ा झटका है। इससे महंगाई बढ़ेगी, करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा, रुपया दबाव में आएगा और कुल मिलाकर इससे जीडीपी की ग्रोथ में कमी आएगी। इतना ही नहीं कंपनियों के अर्निंग्स पर भी दबाव बढ़ेगा। उन सेक्टर पर असर ज्यादा पड़ेगा, जिनकी निर्भरता ऑयल पर है। सरकार स्थिति से निपटने की पूरी कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से इस बारे में अपील की है।
इन सेक्टर और शेयरों में दिख रहे निवेश के मौके
अभी कहां निवेश के मौके दिख रहे हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी कुछ डोमेस्टिक थीम अट्रैक्टिव दिख रहे हैं। इनमें प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल्स शामिल हैं। इन शेयरों में हिस्टोरिकल एवरेज के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर ट्रेडिंग हो रही है। बैंकों की एसेट क्वालिटी में इम्प्रूवमेंट है। कुछ हेल्थकेयर स्टॉक्स (हॉस्पिटल्स, स्पेशियलिटी फार्मा), सीमेंट/इंफ्रा स्टॉक्स को सरकार के पूंजीगत खर्च का फायदा मिलेगा। कुछ अच्छी क्वालिटी के कंज्यूमर और डिस्क्रेशनरी स्टॉक्स और ब्रांड्स में भी निवेश के मौके दिख रहे हैं। ऑयल-सेंसेटिव स्टॉक्स जैसे सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों और पेट्रोकेमिकल्स स्टॉक्स से तब तक दूर रहना ठीक रहेगा, जब तक जियोपॉलिटिकल टेंशन कम नहीं हो जाता।
ट्रंप और जिनपिंग की बातचीत से टेंशन घटने के आसार
क्या अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन घटेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत से मध्यपूर्व में टेंशन घटने की उम्मीद बढ़ी है। चीन का ईरान पर अच्छा प्रभाव है। इसके अलावा उसकी दिलचस्पी ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी की कीमतों में स्टैबलिटी में है। ऐसे में जिनपिंग और ट्रंप की बातचीत का सेंटिमेंट पर जल्द असर दिख सकता है। हालांकि, ऑयल की कीमतें सामान्य लेवल पर आने में थोड़ा समय लग सकता है।
इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर किसी तरह का निगेटिव असर नहीं
शाह ने कहा कि कुल मिलाकर इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर कोई असर नहीं पड़ा है। जियोपॉलिटिक्स और ऑयल की ऊंची कीमतों की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव है। लेकिन, इनवेस्टर्स अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स में अनुशासन के साथ निवेश जारी रख सकते हैं। बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों का लगातार सपोर्ट मिल रहा है। ऐसे में उन निवेशकों को काफी फायदा होगा, जो धैर्य के साथ सिप से निवेश में अनुशासन बनाए रखेंगे।
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