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विदेशी निवेशकों की बेरुखी जल्दी दूर होने की उम्मीद नहीं, अगले 2-3 महीने बाजार के लिए काफी मुश्किल -अभय अग्रवाल

अमेरिकी लीडर चाहे जो भी कहें, सच्चाई यही है कि यूएस में अभी भी डेफिसिट बहुत ज्यादा है और उसमें कमी होने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में हम एक ऐसी स्थिति में हैं जहां साफ लग रहा है कि अमेरिका रेट कम करने की चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, उसकी यह कोशिश फेल होनी ही है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Sep 10, 2026 पर 3:51 PM
विदेशी निवेशकों की बेरुखी जल्दी दूर होने की उम्मीद नहीं, अगले 2-3 महीने बाजार के लिए काफी मुश्किल -अभय अग्रवाल
जब बाजार में पार्टिसिपेशन कम होता है तभी खरीदारी का माहौल बनता है। निवेश के नजरिए से इस समय मिड कैप और स्माल कैप में ज्यादा अच्छे मौके हैं

मार्केट आउटलुक पर बात करते हुए् पाइपर सेरिका (Piper Serica) के फाउंडर और फंड मैनेजर अभय अग्रवाल ने कहा कि इस समय बाजार को जो प्रॉब्लम सबसे ज्यादा परेशान कर रही है वह है अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़त। अभी ऐसा नहीं लगता है कि बॉन्ड यील्ड में हो रही ये बढ़त थमेगी। बस हमें यही देखना है कि यह स्थिति और कितनी खराब होगी। दुनिया में काफी देश हैं जिनके पास अमेरिकी बॉन्ड हैं। जापान के पास तो 15 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के यूएस बोंड्स हैं। यह अब अमेरिका बॉन्ड खरीद भी नहीं रहा है। बल्की येन को संभालने के लिए अमेरिकी बॉन्ड की बिकवाली कर रहा है। जापान जैसा बड़ा बॉन्ड खरीदने वाला देश जब इसकी बिकवाली करने लगेगा तो स्वाभाविक है कि यूएस में जो बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी ही।

अमेरिकी लीडर चाहे जो भी कहें, सच्चाई यही है कि यूएस में अभी भी डेफिसिट बहुत ज्यादा है और उसमें कमी होने की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में हम एक ऐसी स्थिति में हैं जहां साफ लग रहा है कि अमेरिका रेट कम करने की चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, उसकी यह कोशिश फेल होनी ही है। ऐसे स्थिति में भारत जैसे उभरते बाजारों में आने वाले विदेशी निवेश पर दबाव रहेगा। जब तक इंटरेस्ट रेट का मसला सुलझता नहीं है, हमें उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए कि भारत में फॉरेन इन्वेस्टमेंट की स्थिति में सुधार होगा। ब्याज दरों पर तस्वीर साफ होने पर ही विदेशी फ्लो संभव है।

भारत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आरबीआई अभी ब्याज दरों में बढ़त नहीं करेगा। लेकिन आईबीआई लिक्विडिटी कम करने के लिए कदम उठा सकता है। ऐसा करने के लिए उसके पास काफी विकल्प भी हैं। ऐसे माहौल में इक्विटी मार्केट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए निवेश के काफी अच्छे मौके नजर आ रहे हैं।

क्योंकि जब बाजार में पार्टिसिपेशन कम होता है तभी खरीदारी का माहौल बनता है। निवेश के नजरिए से इस समय मिड कैप और स्माल कैप में ज्यादा अच्छे मौके हैं। उन्होंने बताया कि उनके पोर्टफोलिये में 75% हिस्सा स्माल कैप का है। लेकिन यह भी ध्यान में रहना चाहिए इस सेगमेंट की तमाम अच्छी कंपनियों के शेयर काफी महंगे हो गए है। अच्छी ग्रोथ की संभावना वासी ऐसी कंपनियों पर ही फोकस होना चाहिए जो सही भाव पर मिल रही हों। इस समय निवेशकों के अपने पोर्टफोलियो में थोड़ा कैश एलोकेशन बढ़ाना चाहिए और ग्रोथ तलाशना चाहिए। हालांकि, ऐसे शेयर काफी कम हैं।

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