NSE ने सोमवार को इनवेस्टर्स को फ्रॉड करने वालों के झांसे में नहीं आने को कहा है। उसने कहा कि कुछ लोग अवैध डब्बा ट्रेडिंग (Dabba Trading) का शिकार इनवेस्टर्स को बना रहे हैं। इसमें इनवेस्टर्स को रिटर्न की गारंटी दी जाती है। ऐसे लोग एनएसई (NSE) के रजिस्टर्ड सदस्य नहीं होते हैं। इस बारे में पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। एनएसई ने कहा है कि इनवेस्टर्स को स्टॉक मार्केट से जुड़ी ऐसी किसी स्कीम या प्रोडक्ट में इनवेस्ट नहीं करना चाहिए, जिनके रिटर्न की गारंटी का दावा कोई व्यक्ति या कंपनी करती है। कानून में इस तरह के दावे की इजाजत नहीं है। ऐसा करना गैरकानूनी है।
डब्बा ट्रेडिंग का मतलब क्या है?
एनएसई ने कहा, "इनवेस्टर्स को अवैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ट्रेड नहीं करने की भी सलाह दी जाती है। अगर कोई निवेशक ऐसा करता है तो रिस्क और उसके परिणाम उसके अपने होंगे। अवैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म एक्सचेंज से एप्रूव्ड नहीं होते हैं।" सवाल है कि आखिर डब्बा ट्रेडिंग क्या है? 'डब्बा' मतलब ऐसे बॉक्स से है, जिसका इस्तेमाल गुड़्स को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए होता है। यहां इसका मतलब ब्रोकरों के ऐसे नेटवर्क से है, जो छोटे ऑफिसेज या घर से काम करते हैं। वे अपने क्लाइंट्स की तरफ से ट्रेड करने के लिए अपने मोबाइल फोन या दूसरे डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।
डब्बा ट्रेडिंग क्यों गैरकानूनी है?
शेयरों में डब्बा ट्रेडिंग को गैरकानूनी माना जाता है। इसमें ट्रांजेक्शन अनऑफिशियल चैनल या ऑफ-मार्केट प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाते हैं। इन्हें सेबी की मान्यता हासिल नहीं होती है। इसमें इनसाइडर ट्रेडिंग और मैनिपुलेशन का इस्तेमाल होता है। चूंकि, ये मार्केट रेगुलेटर के दायरे में नहीं आते, जिससे इनवेस्टर्स नुकसान की स्थिति में कहीं शिकायत नहीं कर सकता है। डब्बा ट्रेडिंग करने का दोषी पाए जाने पर व्यक्ति या कंपनी पर जुर्माना लग सकता है या जेल की सजा हो सकती है।
NSE ने क्यों निवेशकों को आगाह किया?
NSE ने इससे पहले पाया था कि श्री पारसनाथ कमोडिटी प्राइवेट लिमिटेड, श्री पारसनाथ बुलियन प्राइवेट लिमिटेड, Faary Trading और भरत कुमार रिटर्न की गारंटी के साथ डब्बा या अवैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहे थे। आम तौर पर ऐसे निवेशक फर्जीवाड़ा करने वाली ऐसी कंपनियों या व्यक्ति के जाल में फंसते हैं जिन्हें सेबी के नियम और कानूनों की जानकारी नहीं होती है।