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NSE को-लोकेशन स्कैम को समझना चाहते हैं? पहले जानिए NSE-TAP मामला क्या है

SEBI ने देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज को नोटिस भेजा है। इसमें कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के सॉफ्टवेयर के दुरूपयोग के आरोप पर जवाब मांगा गया है। टैक्स अथॉरिटीज ने को-लोकेशन स्कैम के आरोपी ब्रोकर्स पर 2017 में छापा मारा था। इसमें उन्हें TAP मैनिपुलेशन से जुड़े ईमेल्स मिले थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 07, 2023 पर 12:41 PM
NSE को-लोकेशन स्कैम को समझना चाहते हैं? पहले जानिए NSE-TAP मामला क्या है
हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स ने कथित रूप से TAP का गलत इस्तेमाल किया। इसके लिए उन्होंने स्पेशल सॉफ्टवेयर की मदद ली। यहां तक कि उन्होंने NSE को ट्रांजेक्शन फीस के पेमेंट से भी बचने की कोशिश की।

NSE की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं। खबरों के मुताबिक, SEBI ने देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज को नोटिस भेजा है। इसमें कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के सॉफ्टवेयर के दुरूपयोग के आरोप पर जवाब मांगा गया है। टैक्स अथॉरिटीज ने को-लोकेशन स्कैम के आरोपी ब्रोकर्स पर 2017 में छापा मारा था। इसमें उन्हें TAP मैनिपुलेशन से जुड़े ईमेल्स मिले थे। सूत्रों ने यह जानकारी दी। ये आरोप 2013 में ट्रेडिंग एक्सेस प्वाइंट (Trading Access Point) यानी TPA सॉफ्टवेयर के दुरूपयोग से संबंधित हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के को-लोकेशन स्कैम की जांच के दौरान चार साल बाद यह मामला सामने आा था। इस मामले में एनएसई की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण और रवि नारायण कथित रूप से शामिल हैं।

हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स ने कथित रूप से TAP का गलत इस्तेमाल किया। इसके लिए उन्होंने स्पेशल सॉफ्टवेयर की मदद ली। यहां तक कि उन्होंने NSE को ट्रांजेक्शन फीस के पेमेंट से भी बचने की कोशिश की। इन बातों के सामने आने पर मार्केट रेगुलेटर (SEBI) ने हाल में एनएसई को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) भेजा था।

क्या है TAP System और इसका दुरूपयोग कैसे किया गया?

SEBI में मार्केट सर्विलांस के पूर्व चीफ दीपक संचेती ने TAP के बारे में विस्तार से बताया। TAP एक रियल-टाइम सिस्टम है, जिसे एनएसई ने ट्रेडिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया था। तब मौजूदा 2-टियर सिस्टम को 3-टियर सिस्टम बनाया जा रहा था। यह बताया गया कि इससे मौजूदा सिस्टम पर लोड में कमी आएगी।

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