NSE की योगी गाथा : पद के मिसयूज, हेराफेरी और अंधविश्वास की अनोखी कहानी
NSE के आधुनिक एल्गोरिद्म पर आधारित सुपरफास्ट ट्रेडिंग में एक तकनीकी खराबी आने से शेयर कारोबार की पुरुषों के वर्चस्व वाली दुनिया में रामकृष्ण को NSE के शीर्ष पद पर आने का मौका मिला था
MoneyControl News
अपडेटेड Feb 21, 2022 पर 1:17 PM
13 अप्रैल 2013 को NSE की कमान औपचारिक रूप से चित्रा रामकृष्ण को सौंप दी गई थी
NSE Scam : भारत के टॉप स्टॉक एक्सचेंज एनएसई (NSE) की तत्कालीन सीईओ चित्रा रामकृष्ण (Chitra Ramkrishna) ने आठ साल पहले पीटीआई से कहा था कि टेक्नोलॉजी एक ऐसा शेर है, जिस पर हर कोई सवार है। उस समय, वह खुद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के टॉप पोस्ट पर तैनात थीं। एनएसई (NSE) ने 1994 में अपनी शुरुआत के एक साल के भीतर ही भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के रूप में 100 साल पुराने बीएसई (BSE) को पछाड़ दिया था।
तकनीक गड़बड़ी से मिला था रामकृष्ण को मौका
NSE के आधुनिक एल्गोरिद्म पर आधारित सुपरफास्ट ट्रेडिंग में एक तकनीकी खराबी आने से शेयर कारोबार की पुरुषों के वर्चस्व वाली दुनिया में रामकृष्ण को NSE के शीर्ष पद पर आने का मौका मिला था। NSE में पांच अक्टूबर 2012 की सुबह आई इस तकनीकी खराबी से निवेशकों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए थे।
इसके बाद एनएसई के तत्कालीन सीईओ रवि नारायण (Ravi Narain) को पद छोड़ना पड़ा और कुछ महीने बाद, 13 अप्रैल 2013 को NSE की कमान औपचारिक रूप से चित्रा रामकृष्ण को सौंप दी गई।
आज 59 वर्षीय रामकृष्ण एक अजीबोगरीब स्कैम के केंद्र में हैं, जब बाजार नियामक सेबी की जांच में यह पता चला कि एक्सचेंज के प्रमुख व्यावसायिक निर्णय लेने में उन्हें एक रहस्यमय हिमालयी योगी निर्देश दे रहे थे।
घटनाक्रम से अवगत कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब वक्त आ गया है कि इस प्रतिष्ठित संस्थान की गहराई के साथ सफाई की जाए और सरकार की तरफ से सभी रेगुलेटर, प्रवर्तन एजेंसियों और जांच एजेंसियों को इस मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए गए हैं।
एनएसई बोर्ड में शामिल सभी डायरेक्टर जांच के दायरे में
रेगुलेटर के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने कहा कि टॉप मैनेजमेंट और कुछ प्रमुख डायरेक्टर स्पष्ट रूप से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश में लगभग हर रेगुलेटर, प्रशासनिक एजेंसी और जांच एजेंसी इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं और जांच के दायरे में उन सभी डायरेक्टर्स को शामिल किया गया है, जो इन वर्षों के दौरान NSE बोर्ड में रहे।
जांच सिर्फ योगी की पहचान सुनिश्चित करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि बोर्ड, रेगुलेटर और सरकार सहित विभिन्न स्तरों पर चूक के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है।
एक अन्य पूर्व रेगुलेटर ने कहा, ऐसा लगता है कि पूर्व और सेवारत नौकरशाहों, कुछ अत्यधिक महत्वाकांक्षी दलालों, शीर्ष सरकारी अधिकारियों और एक्सचेंज में शामिल कुछ कॉरपोरेट अधिकारियों की एक मंडली ने अपने निजी फायदे के लिए विभिन्न खामियों को पैदा किया और उसका फायदा उठाया। अधिकारियों ने कहा कि अब ऊपर से निर्देश आए हैं कि किसी को भी बख्शा न जाए और हर एक गलत काम या चूक को उजागर किया जाए।
सेबी ने अपने आदेश में किया ‘योगी’ का जिक्र
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने NSE मामले में 190 पृष्ठों के अपने आदेश में कहा है कि NSE की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण पर हिमालय के पहाड़ों में रहने वाले किसी 'आध्यात्मिक गुरु' का प्रभाव था। यह मामला आनंद सुब्रमण्यम को मुख्य रणनीतिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किए जाने और उनका पदनाम बदलकर ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर और एमडी का एडवाइजर किए जाने के लिए कंपनी संचालन में खामियों से भी जुड़ा है।
योगी को ‘शिरोमणि’ कहती थीं रामकृष्ण
सेबी (SEBI) के आदेश के अनुसार अप्रैल, 2013 से दिसंबर, 2016 तक NSE की एमडी और सीईओ पद पर रहीं रामकृष्ण कथित तौर पर हिमालय में रहने वाले इस योगी को 'शिरोमणि' कहकर बुलाती थीं। NSE की पूर्व प्रमुख का दावा है कि वह हिमालय की पहाड़ियों में रहते हैं और उन्हें 20 वर्षों से व्यक्तिगत और पेशेवर मामलों में सलाह देते रहे हैं।