IPO प्राइस से नीचे चल रहा NSE का शेयर, क्या यही है दांव लगाने का सही टाइम? 5 ब्रोकरेज ने जारी की रिपोर्ट

लिस्टिंग के बाद से ज्यादातर वक्त IPO प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे NSE के शेयर पर पांच बड़े ब्रोकरेज ने भरोसा जताया है। जानिए किसने कितना टारगेट दिया, 1,782.10 रुपये के भाव से कितनी तेजी की गुंजाइश है, मॉर्गन स्टैनली ने NSE को भारत के कैपिटल मार्केट्स का इंजन क्यों कहा और जेफरीज के मुताबिक नए कारोबार 2030 तक कमाई में कितना जोड़ सकते हैं

अपडेटेड Nov 02, 2026 पर 2:13 PM
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मॉर्गन स्टैनली और जेपी मॉर्गन ने NSE के शेयर पर ओवरवेट रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयर पर वॉल स्ट्रीट के बड़े ब्रोकरेज हाउस ने खुलकर भरोसा जताया है। मॉर्गन स्टैनली और जेपी मॉर्गन ने NSE के शेयर पर ओवरवेट रेटिंग के साथ कवरेज की शुरुआत की है। मॉर्गन स्टैनली ने 12 महीने के लिए 2,315 रुपये का टारगेट दिया है। शुक्रवार को शेयर 1,782.10 रुपये पर बंद हुआ था और इस भाव से यह टारगेट करीब 29.90% की तेजी की गुंजाइश दिखाता है। भारत की 360 वन कैपिटल मार्केट्स ने भी इस शेयर को खरीदने की सलाह दी है।

IPO प्राइस से नीचे चल रहा शेयर

NSE का शेयर सितंबर में बाजार में लिस्ट हुआ था। तब से अब तक ज्यादातर वक्त यह अपने IPO प्राइस से नीचे ही कारोबार करता नजर आया है। शेयर की इस सुस्त चाल के बीच बड़े ब्रोकरेज हाउस की राय बिल्कुल अलग दिशा में खड़ी है। उनका मानना है कि भारत का कैपिटल मार्केट जैसे-जैसे गहरा होगा, उसमें NSE का दबदबा और बढ़ता जाएगा।


इस भरोसे की जड़ में भारत के कैपिटल मार्केट के स्ट्रक्चरल विस्तार पर यकीन है। डेरिवेटिव्स कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ने को लेकर नजदीकी समय की चिंताएं जरूर हैं, लेकिन इनके बावजूद बड़ी तस्वीर पर ब्रोकरेज का उत्साह बना हुआ है। दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में निवेशकों का दायरा लगातार फैल रहा है और ट्रेडिंग गतिविधि भी बढ़ रही है। इसका फायदा देश के टॉप एक्सचेंज को मिल सकता है, फिर चाहे बाजार ऊपर जाए या नीचे।

इसे एक भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन की तरह देखिए। स्टेशन को इससे फर्क नहीं पड़ता कि ट्रेन उत्तर की ओर जा रही है या दक्षिण की ओर। उसके लिए अच्छी खबर बस यह है कि प्लेटफॉर्म पर मुसाफिर बढ़ते रहें। NSE के लिए भी बाजार में आने वाले नए निवेशक और बढ़ती ट्रेडिंग वही मुसाफिर हैं।

किस ब्रोकरेज ने दिया कितना टारगेट?

सबसे ज्यादा बुलिश नजरिया मॉर्गन स्टैनली का है। ब्रोकरेज ने NSE के शेयर के लिए 12 महीने में 2,315 रुपये का टारगेट तय किया है। शुक्रवार के 1,782.10 रुपये के बंद भाव से यह टारगेट 532.90 रुपये ऊपर है, यानी करीब 29.90% की तेजी। मॉर्गन स्टैनली ने शेयर पर ओवरवेट रेटिंग दी है, यानी ब्रोकरेज को उम्मीद है कि यह शेयर आगे बेहतर प्रदर्शन करेगा।

जेपी मॉर्गन ने भी ओवरवेट रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और शेयर के 2,130 रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है। शुक्रवार के बंद भाव के हिसाब से यह करीब 19.52% की तेजी बनती है। वहीं 360 वन कैपिटल मार्केट्स ने शेयर खरीदने की सलाह देते हुए 2,100 रुपये का टारगेट रखा है, जो बंद भाव से करीब 17.84% ऊपर है।

तीनों टारगेट को एक साथ रखें तो सबसे ऊंचे और सबसे नीचे टारगेट के बीच 215 रुपये का फर्क है। लेकिन एक बात तीनों में साझा है, सभी ब्रोकरेज को शेयर में मौजूदा भाव से कम से कम 17% से ज्यादा की तेजी की गुंजाइश दिख रही है।

इन तीनों के अलावा दो और बड़े नाम NSE के पक्ष में हैं। जेफरीज ने भी शेयर पर बाय की सलाह दी है, जबकि मैक्वेरी कैपिटल ने इसे आउटपरफॉर्म रेटिंग दी है। यानी कुल मिलाकर पांच ब्रोकरेज हाउस इस शेयर को लेकर पॉजिटिव नजरिया रखते हैं।

एक बात निवेशकों को ध्यान में रखनी चाहिए। मॉर्गन स्टैनली, जेपी मॉर्गन और 360 वन, इन तीनों फर्मों की सहयोगी कंपनियां उन बैंकों में शामिल थीं, जिन्होंने NSE के IPO पर काम किया था।

मॉर्गन स्टैनली ने NSE को क्यों कहा कैपिटल मार्केट्स का इंजन

मॉर्गन स्टैनली ने NSE को 'भारत के कैपिटल मार्केट्स का इंजन' बताया है। जैसे ट्रेन का इंजन पूरे डिब्बों को आगे खींचता है, वैसे ही ब्रोकरेज की नजर में NSE भारत के बाजार की पूरी गाड़ी को आगे ले जाने वाली ताकत है।

ब्रोकरेज के मुताबिक NSE परिवारों की बचत के बाजार से जुड़ने यानी फाइनेंशियलाइजेशन और इक्विटी की ओर बढ़ते रुझान पर एक मजबूत दांव है। मतलब, लोगों की बचत का पैसा जितना ज्यादा बाजार से जुड़े प्रोडक्ट्स की तरफ आएगा और जितने ज्यादा लोग शेयरों में पैसा लगाएंगे, उसका सीधा रास्ता NSE से होकर ही गुजरेगा।

मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि भारत का बाजार अभी भी कम पहुंच वाला है। काम करने की उम्र वाले भारतीयों में से सिर्फ 3.2% लोग ही NSE के कैश मार्केट में ट्रेड करते हैं। इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वालों का आंकड़ा तो और भी छोटा है, सिर्फ 0.7%।

इन आंकड़ों को एक मोहल्ले के हिसाब से समझिए। मान लीजिए किसी मोहल्ले में काम करने की उम्र वाले 1,000 लोग रहते हैं। इनमें से सिर्फ 32 लोग ही NSE के कैश मार्केट में ट्रेड करते हैं और इक्विटी डेरिवेटिव्स में सिर्फ 7 लोग। बाकी सैकड़ों लोग अभी बाजार के दरवाजे के बाहर खड़े हैं। ब्रोकरेज के लिए यही खाली जगह आगे की ग्रोथ की सबसे बड़ी गुंजाइश है।

बाजार पर NSE की पकड़ कितनी मजबूत

मॉर्गन स्टैनली को उम्मीद है कि NSE की दबदबे वाली स्थिति और उसका एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल शेयर के प्रीमियम वैल्यूएशन को सपोर्ट करेगा। एसेट-लाइट मॉडल का मतलब है कि कंपनी को कारोबार चलाने और बढ़ाने के लिए बहुत भारी-भरकम संपत्ति खड़ी नहीं करनी पड़ती। प्रीमियम वैल्यूएशन का मतलब है कि निवेशक ऐसी कंपनी के शेयर के लिए दूसरों के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं।

बाजार में NSE की हिस्सेदारी के आंकड़े इस दबदबे की पूरी कहानी कहते हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक कैश इक्विटी मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 90% से ज्यादा है। यानी इस बाजार में हर 10 में से 9 से ज्यादा हिस्सा अकेले NSE के पास है।

इक्विटी फ्यूचर्स और सिंगल-स्टॉक ऑप्शंस में तो तस्वीर और भी एकतरफा है। इन दोनों सेगमेंट का लगभग पूरा कारोबार NSE के पास ही है। इंडेक्स ऑप्शंस की बात करें तो मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक इस सेगमेंट में NSE की हिस्सेदारी करीब 65% पर स्थिर होती दिख रही है।

नए कारोबार खोलेंगे कमाई के नए दरवाजे

NSE की कमाई का बड़ा सहारा अभी इक्विटी ऑप्शंस हैं। जेफरीज का मानना है कि कुछ नए कारोबार इस निर्भरता को कम कर सकते हैं। इनमें कमोडिटी कारोबार, म्यूचुअल फंड ऑर्डर करने का प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स शामिल हैं।

जेफरीज के मुताबिक ये नए कारोबार वित्त वर्ष 2030 तक NSE के रेवेन्यू और मुनाफे में करीब 15% का इजाफा कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिए कि जिस दुकान की ज्यादातर बिक्री एक ही सामान से होती हो, वह अगर अपनी अलमारियों में कुछ नए सामान सजा ले, तो उसकी कमाई किसी एक चीज के भरोसे नहीं रहती। NSE के लिए ये नए कारोबार वही नई अलमारियां हैं।

360 वन ने कमाई को लेकर क्या कहा

360 वन कैपिटल मार्केट्स के एनालिस्ट स्वर्णभ मुखर्जी ने अपने नोट में NSE की कमाई को लेकर उम्मीद जताई है। उन्होंने लिखा कि कैपिटल मार्केट के हालात में सुधार, साथ ही कमाई के छोटे जरियों से मिलने वाली संभावित बढ़त, अर्निंग्स को और सहारा दे सकती है।

यानी 360 वन की नजर दो चीजों पर है। पहली, बाजार के हालात का पटरी पर लौटना। दूसरी, कमाई के उन छोटे जरियों का बढ़ना, जो आज भले छोटे हों लेकिन आगे चलकर कमाई में अपना हिस्सा जोड़ सकते हैं। इसी भरोसे के साथ 360 वन ने NSE के शेयर पर 2,100 रुपये के टारगेट के साथ खरीदारी की सलाह दी है।

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