कच्चे तेल की लगातार चौथे दिन की फिसलन ने गुरुवार को तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयरों की हवा निकाल दी। ऑयल इंडिया 5% से ज्यादा टूटकर NSE पर ₹428 पर आ गया और ONGC भी करीब 2% नीचे फिसल गया। इस हफ्ते अब तक क्रूड करीब 16% सस्ता हो चुका है।
कच्चे तेल की लगातार चौथे दिन की फिसलन ने गुरुवार को तेल निकालने वाली कंपनियों के शेयरों की हवा निकाल दी। ऑयल इंडिया 5% से ज्यादा टूटकर NSE पर ₹428 पर आ गया और ONGC भी करीब 2% नीचे फिसल गया। इस हफ्ते अब तक क्रूड करीब 16% सस्ता हो चुका है।
एक हफ्ते में 16% सस्ता हुआ क्रूड
शेयरों में आई इस बिकवाली की जड़ पिछले सेशन में है। तब ब्रेंट और WTI, दोनों 8% से ज्यादा लुढ़क गए थे और 31 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर जाकर बंद हुए थे। इतनी बड़ी गिरावट के बाद गुरुवार को भी तेल को सहारा नहीं मिला।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03% और नीचे आकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। WTI क्रूड फ्यूचर्स भी 1.29% गिरकर 86.98 डॉलर पर पहुंच गया। यानी इस हफ्ते अब तक क्रूड करीब 16% सस्ता हो चुका है।
कुछ समय पहले जिन जियोपॉलिटिकल खतरों ने तेल के दाम ऊपर धकेले थे, बाजार अब उन्हीं खतरों को नए सिरे से तौल रहा है। ये नया आकलन इतनी तेजी से हुआ है कि कुछ ही दिनों में कीमतों का पूरा रुख पलट गया।
ऑयल इंडिया पर सबसे भारी पड़ा दिन
ऑयल इंडिया और ONGC जैसी अपस्ट्रीम कंपनियां कच्चा तेल खोजने और निकालने का काम करती हैं। इनके लिए क्रूड का भाव वैसा ही है, जैसा किसी किसान के लिए मंडी का भाव। फसल उतनी ही हो, लेकिन भाव गिर जाए तो जेब में कम पैसा आता है। इन कंपनियों को तेल बेचकर जो रकम मिलती है, यानी रियलाइजेशन, वो सीधे क्रूड की कीमत से जुड़ी होती है।
क्रूड महंगा हो तो इनकी कमाई चमकती है। क्रूड सस्ता हो तो हर बैरल से होने वाली अनुमानित कमाई घट जाती है और मुनाफे का हिसाब भी छोटा होने लगता है। गुरुवार को बाजार ने यही हिसाब लगाया और इन शेयरों से पैसा निकाला।
अपस्ट्रीम शेयरों में सबसे ज्यादा चोट ऑयल इंडिया को लगी। NSE पर ये 5% से ज्यादा टूटकर ₹435 पर आ गया। ONGC अपेक्षाकृत कम गिरा और खबर लिखे जाने तक करीब 2% नीचे कारोबार कर रहा था।
रिफाइनरी शेयर भी नहीं बच पाए
गिरावट का दायरा तेल निकालने वाली कंपनियों से आगे तक फैला। चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन 5.26% टूट गया। मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) में भी करीब 4% की गिरावट रही।
कुछ शेयरों पर दबाव हल्का रहा। पनामा पेट्रोकेम 1.73% फिसला, जबकि जिंदल ड्रिलिंग एंड इंडस्ट्रीज में सिर्फ 0.3% की कमजोरी दिखी।
बिकवाली के बीच एक शेयर उल्टी चाल पर
जब पूरा सेगमेंट लाल निशान में डूबा था, तब मनाली पेट्रोकेमिकल्स अकेला ऊपर चढ़ रहा था। इसका शेयर करीब 2% मजबूत रहा। सेक्टर से अलग इस चाल की वजह कंपनी के आने वाले तिमाही नतीजे हैं।
कंपनी ने एक्सचेंज को बताया है कि शुक्रवार, 6 नवंबर को उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक होगी। इसमें बाकी मुद्दों के साथ 30 सितंबर 2026 को खत्म तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड नतीजों पर विचार होगा।
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