Ola Electric Shares: ओला इलेक्ट्रिक के शेयर आज 9 सितंबर को शुरुआती कारोबार में करीब 4 फीसदी तक गिर गए। कंपनी के शेयरों में यह गिरावट ऐसे दिन में आई है, जब करीब उसके 18.18 करोड़ शेयर का लॉक-इन पीरियड आज खत्म हुआ है। लॉक-इन पीरियड खत्म होने का मतलब है कि अब से ये शेयर खरीदने-बेचने के लिए योग्य है। ये शेयर कंपनी की कुल करीब 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। दरअसल ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयर बाजार में लिस्टिंग के एक महीने पूरे हो गए हैं। नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च ने एक रिपोर्ट में बताया था कि लिस्टिंग के एक महीना पूरा होने के साथ ही इसके 18.18 करोड़ शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म हो जाएगा।
हालांकि, यहां ये बताना जरूरी है कि लॉक-इन अवधि खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि ये सभी शेयर अनिवार्य रूप से बेचे जाएंगे। इसका मतलब ये है कि ये शेयर अब बस ट्रेडिंग के लिए योग्य हो जाएंगे।
सुबह 9.40 बजे, कंपनी के शेयर एनएसई पर करीब 4 फीसदी की गिरावट के साथ 105.3 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे थे।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 5 सितंबर 2024 से 30 नवंबर 2024 के बीच कुल 38 कंपनियों के करीब 21 अरब डॉलर के शेयरों का लॉक-इन पीरियड खत्म होगा। ब्रोकरेज ने कहा, "लेकिन यह ध्यान रखना अहम है कि ये सभी शेयर बिक्री के लिए नहीं आएंगे क्योंकि इनमें से एक बड़ा हिस्सा प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के पास भी है।"
इस बीच ब्रोकरेज फर्म HSBC ने ओला इलेक्ट्रिक के शेयर 140 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ कवर करना शुरू किया है। हालांकि HSBC का भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को लेकर कर्जेंविट रुख है, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि सरकार की ओर से पॉलिसी के स्तर पर लगातार मिल रहे समर्थन, लागत कम करने की क्षमता और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस के चलते ओला इलेक्ट्रिक 'निवेश करने लायक' है।
ओला इलेक्ट्रिक के भाविश अग्रवाल का मानना है कि पारंपरिक दोपहिया वाहन कंपनियों के सामने अपने ICE मॉडल को खत्म करने का जोखिम है, और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कारोबार को आगे बढ़ाने के दौरान उनकी बैलेंस शीट पर बुरा असर पड़ सकता है। बता दें कि ओला इलेक्ट्रिक के शेयर 76 रुपये के अपने IPO प्राइस पर सपाट लिस्ट हुए थे, तब से अबतक कंपनी के शेयरों में करीब 44 फीसदी की तेजी आ चुकी है।
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