Packaging cost: पैकेजिंग इंडस्ट्री पर युद्ध की छाया, क्रूड की महंगाई ने बढ़ाई लागत

Packaging cost: कच्चे तेल की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से पैकेजिंग इंडस्ट्री भी परेशान है। रॉ मटेरियल की लागत में करीब 50-60 फीसदी की बढ़ोत्तरी से पैकेजिंग मटेरियल महंगा हो गया है। इससे कंपनियों की प्रोडक्ट पैकेजिंग कॉस्ट भी तकरीबन 15 से 20 परसेंट बढ़नी तय है

अपडेटेड Mar 14, 2026 पर 10:00 AM
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वेस्ट एशिया में युद्ध चलते पैकेजिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनियों के सामने रॉ मटेरियल का संकट खड़ा हो गया है।

Packaging cost: कच्चे तेल की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से पैकेजिंग इंडस्ट्री भी परेशान है। रॉ मटेरियल की लागत में करीब 50-60 फीसदी की बढ़ोत्तरी से पैकेजिंग मटेरियल महंगा हो गया है। इससे कंपनियों की प्रोडक्ट पैकेजिंग कॉस्ट भी तकरीबन 15 से 20 परसेंट बढ़नी तय है।

वेस्ट एशिया में युद्ध चलते पैकेजिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनियों के सामने रॉ मटेरियल का संकट खड़ा हो गया है। बबल रैप और EPC फोम बनाने वाली नोएडा की एक कंपनी का कहना है प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स की कीमतें पिछले 10 दिनों में 95-100 रुपए प्रति किलो से बढ़कर सीधे 160 से 170 रुपए प्रति किलो हो गया है।जिससे कारोबार पर प्रभाव पड़ रहा है।

पैकेजिंग मटेरियल का इस्तेमाल ऑटोमोबाइल से लेकर OEMs, और व्हाईटगुड्स बनाने वाली कंपनियां बड़े पैमाने पर करती हैं। इसके अलावा ई कॉमर्स कारोबार में पैकेजिंग का अहम रोल है जिससे ग्राहकों तक सेफ डिलीवरी संभव हो पाती है।अब पैकेजिंग मटेरियल के महंगा होने से प्रोडक्ट की लागत बढ़ रही है।


देश की पैकेजिंग इंडस्ट्री इस वक्त करीब 100 से 105 बिलियन डॉलर की है जिसके 2030 तक करीब 170 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

किसी भी प्रोडक्ट के पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला ये बबल रैप इस प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स से बनता है। जिसकी सप्लाई सीधे रिफाइनरीज से होती है क्योंकि पैकेजिंग इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर रॉ मटेरियल क्रूड यानी कच्चे तेल का बाई- प्रोडक्ट होता है। ऐसे में क्रूड की कीमत बढ़ने और इसके शॉर्टेज से पूरे पैकेजिंग इंडस्ट्री पर मार पड़ रही है।

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