Paytm का स्टॉक नवंबर 2021 में लिस्ट हुआ था। तब से यह किसी न किसी वजह से चर्चा में रहा है। 31 जनवरी को RBI के पेटीएम पेमेंट बैंक की सेवाएं पर रोक लगा देने से यह फिर से सुर्खियों में आ गया है। केंद्रीय बैंक की यह रोक 1 मार्च से लागू हो जाएगी। इसका असर पेटीएम की पेरेंट कंपनी One97 Communications के शेयरों पर पड़ा है। शेयरों में बड़ी गिरावट आई है।कंपनी ने कहा है कि आरबीआई के कदमों का उसके EBITDA पर 300-500 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह स्टॉक और कितना गिर सकता है? अगर पेटीएम पेमेंट्स बैंक अपने कस्टमर अकाउंट्स किसी दूसरे बैंक में ट्रांसफर नहीं करता है तो केंद्रीय बैंक की रोक के बाद एक तरह से उसकी सेवाएं बंद हो जाएंगी। ऐसे में सवाल यह है कि पेटीएम के स्टॉक में कितनी वैल्यू बची है?
पेटीएम के कामकाज को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। इनमें पेमेंट सर्विस, फाइनेंशियल सर्विस और कॉमर्स एंड क्लाउड सर्विस शामिल हैं। पेमेंट सर्विस कंपनी का मुख्य बिजनेस है। कंपनी मर्चेंट को कंज्यूमर से पेमेंट लेने की सुविधा देती है। इसका एक कस्टमर दूसरे कस्टमर को पैसा ट्रांसफर कर सकती है। साथ ही कस्टमर्स बिल सहित दूसरे तरह के पेमेंट्स भी कर सकते हैं। कंपनी के कुल रेवेन्यू में पेमेंट बिजनेस की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है। फाइनेंशियल सर्विसेज की रेवेन्यू में 21 फीसदी हिस्सेदारी है। यह डेटा इस वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के कंपनी के नतीजों पर आधारित है।
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3.9 करोड़ रजिस्टर्ड मर्चेंट्स
पेटीएम का पेमेंट इकोसिस्टम इंडिया में सबसे बड़ा है। हर महीने यूजर्स की तरफ से 10 करोड़ ट्रांजेक्शन किए जाते हैं। इसके रजिस्टर्ड मर्चेंट्स की संख्या 3.9 करोड़ है। दिसंबर तक इसकी ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) 5.1 लाख करोड़ रुपये थी। डिजिटल पेमेंट्स को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है-पहला है UPI। दूसरा है नॉन-यूपीआई। इसके तहत वॉलेट, कार्ड्स और प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट्स आते हैं।
जनवरी में यूपीआई की ट्रांजेक्शन वैल्यू 18 लाख करोड़ के पार
देश में यूपीआई के जरिए डिजिटल पेमेंट्स में जबर्दस्त उछाल आया है। जनवरी में यूपीआई से कुल ट्रांजेक्शन की वैल्यू 18.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। जनवरी 2023 के मुकाबले यह 42 फीसदी ज्यादा है। कुल डिजिटल पेमेंट्स में यूपीआई की हिस्सेदारी बढ़ी है। यूपीआई ट्रांजेक्शन में पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है। फोनपे और गूगल पे के बाद यह तीसरा सबसे बड़ा प्लेयर है।
रेवेन्यू में पेमेंट बिजनेस की ज्यादा हिस्सेदारी
यूपीआई से होने वाले पेमेंट में कमाई बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए पेटीएम के बिजनेस मॉडल में मर्चेंट्स को साउंडबॉक्स के जरिए सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू शामिल है। साथ ही कंपनी अपने मर्चेंट बेस का इस्तेमाल उन्हें फाइनेंशियल सर्विसेज और क्लाउड सर्विसेज को बेचने के लिए करती है। दिसंबर 2023 में टोटल पीपीआई वॉलेट्स में पेटीएम की हिस्सेदारी करीब 44 फीसदी थी। करीब 78 फंड्स पेटीएम वॉलेट्स के जरिए ट्रांसफर किए गए। 57 फीसदी गुड्स और सर्विसेज के पेमेंट के लिए पेटीएम का इस्तेमाल किया गया।
आरबीआई की कार्रवाई से बड़ा झटका
पेटीएम को उम्मीद थी कि अपने ऐप और बैंकिंग सर्विसेज के जरिए उसे अच्छी वैल्यूएशन हासिल होगी। लेकिन, सुपर-ऐप बनने की उसकी कोशिश बहुत सफल नहीं रही है। आरबीआई की हालिया कार्रवाई के बाद उसके बैंकिंग लाइसेंस के सपने को भी बड़ा झटका लगा है। बाजार की नजरें कंपनी की प्रॉफिट ग्रोथ पर होती हैं। पिछले कुछ सालों में ज्यादा प्रतियोगित और कम मार्जिन वाले बिजनेस में पेटीएम की ग्रोथ अच्छी रही है। लेकिन, कंपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों के पालन में चूक गई है।
क्या अभी है खरीदारी का मौका?
हालिया गिरावट के बाद पेटीएम के शेयरों की वैल्यूएशन आकर्षक लग सकती है। लेकिन, कंपनी के कई बिजनेस का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है। निगेटिव खबरों का असर कंपनी के स्टॉक पर पड़ता है। इसका मतलब है कि पेटीएम के शेयर की कीमत फेयर वैल्यू से कम बनी रहेगी। लेकिन, इसे खरीदारी के मौके के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इनवेस्टर्स को फिलहाल इस स्टॉक से दूरी बनाए रखना ठीक होगा। 12 फरवरी को Paytm का शेयर 1.76 फीसदी की मजबूती के साथ 427 रुपये पर चल रहा था।