क्रूड ऑयल की कीमत अगर बढ़कर 150 डॉलर प्रति बैरल तक जाती है तो शेयर बाजार में और 10-20 फीसदी गिरावट आ सकती है। दिग्गज इनवेस्टर और 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर प्रशांत जैन ने यह बात कही है। क्रूड ऑयल में हाल में आए उछाल से पहले से ही शेयर बाजार की हालत पस्त है। अगर मार्केट में और 10-20 फीसदी की गिरावट आती है तो इनवेस्टर्स को बड़ा नुकसान हो सकता है।
लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ की संभावनाओं पर असर नहीं
प्रशांत जैन ने मनीकंट्रोल के एक प्रोग्राम में बेंगलुरु में यह बात कही। हालांकि, उनका मानना है कि लंबी अवधि में इंडिया की ग्रोथ की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इंडिया के लिए बड़ी चिंता क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें हैं। महंगा ऑयल का असर देश में पूंजी की आवक, इनफ्लेशन और रुपये पर पड़ेगा। पहले से ही डॉलर के मुकाबले रुपया काफी गिर चुका है। यह अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
ऑयल की ऊंची कीमतों का इंडिया पर पड़ रहा असर
दिग्गज इनवेस्टर ने कहा, "मेरा मानना है कि जियोपॉलिटिक्स का असर इंडिया पर ऑयल की कीमतों की वजह से पड़ रहा है। बाकी असर से भारत निपट सकता है।" ऑयल की बढ़ती कीमतें बैलेंस ऑफ पेमेंट के लिहाज से भी चिंता की बात है। जैन का कहना है कि ऑयल की उपलब्धता को लेकर भारत में कोई बड़ी समस्या पैदा होने नहीं जा रही। उन्होंने कहा, "दुनिया में संभवत: रोजाना 50-70 लाख बैरल की कमी है, जो 5-7 फीसदी है। मेरा मानना है कि इंडिया को ऑयल के मामले में दिक्कत नहीं होगी।"
इंडिया एनर्जी क्राइसिस से निकल जाएगा
उन्होंने कहा कि अगर थोड़े समय के लिए ऑयल की कमी की स्थिति बनती भी है तो इंडिया एनर्जी के दूसरे स्रोतों की मदद से स्थिति संभाल लेगा। उन्होंने कहा, "अगर एलपीजी की कमी होती है तो परिवार इंडक्शन या कोयले का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए कर सकते हैं। जिंदगी चलती रहेगी।" एलएनजी के बारे में उन्होंने कहा कि यह बड़ा चैलेंज नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास काफी एलएनजी है। इसे दूसरे देशों से भी इंपोर्ट किया जा सकता है।
2007 में क्रूड 140 डॉलर पर पहुंच गया था
जैन ने कहा है कि इंडिया ने पहले भी ऑयल की ऊंची कीमतों जैसी स्थिति से निपटा है। इसका इकोनॉमिक ग्रोथ और लंबी अवधि में बाजार के प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, "साल 2000 में ऑयल की कीमत 10 डॉलर या 20 डॉलर थी। 2007 में कीमत बढ़कर 140 डॉलर प्रति बैरल चली गई। इसके बावजूद इकोनॉमी की प्रदर्शन अच्छा रहा। बाजारों का भी प्रदर्शन काफी अच्छा रहा।" उन्होंने कहा कि इंडिया ने हमेशा क्राइसिस का सामना सफलता के साथ किया है।