3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और दिग्गज फंड मैनेजर ने आईपीओ में निवेश की अपनी स्ट्रेटेजी बताई। मनीकंट्रोल से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि आईपीओ पेश करने वाली कंपनी का बिजनेस मॉडल टिकाऊ है और वैल्यूएशन सही है तो वह उसमें निवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों के आईपीओ में निवेश करने में उन्हें काफी खुशी होती है। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी के आईपीओ में निवेश वह लंबी अवधि के लिए करते हैं।
जैन (Prashant Jain) ने बताया कि आईपीओ (IPO) में निवेश के दौरान हमारा नजरिया शॉर्ट टर्म नहीं होता। हमारा मकसद लिस्टिंग पर शेयरों को बेचना नहीं होता है। आईपीओ मार्केट के बारे में उन्होंने कहा कि कुछ मेजदार ट्रेंड देखने को मिले हैं। यह साफ है कि आईपीओ की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कंपनियों में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घट रही है। इसकी बड़ी वजह डायल्यूशन है। उन्होंने कहा कि इंडियन कैपिटल मार्केट्स के इतिहास में हमने पहली बार बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी घटाते देखा है।
इंडिया में लिस्ट कराना चाहती हैं विदेशी कंपनियां
उन्होंने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की भारतीय इकाइयां इंडिया में लिस्टिंग कराने पर जोर दे रही हैं। इसकी वजह विदेश के मुकाबले इंडिया में ज्यादा वैल्यूएशन है। उन्होंने हुंडई मोटर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हुंडई ऐसा ताजा मामला है। उम्मीद है कि आगे ज्यादा कंपनियां अपने शेयरों को लिस्ट कराएंगी। यह ट्रेंड सिर्फ एमएनसी तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी कंपनियां भी अपने स्टॉक्स लिस्ट कराएंगी, जिन्हें पैसे की कमी नहीं है। कई कंपनियां शेयरों के जरिए काफी पैसे जुटाना चाहती हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि कुछ पॉकेट्स में वैल्यूएशन काफी ज्यादा अट्रैक्टिव है।
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इस साल आया इंडियन मार्केट का सबसे बड़ा आईपीओ
यह साल आईपीओ के लिहाज से काफी अच्छा रहा है। छोटी-बड़ी करीब 600 कंपनियों ने आईपीओ पेश किए। इनमें एसएमई आईपीओ शामिल हैं। कार बनाने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी हुंडई मोटर का आईपीओ इसी महीने आया। अगले महीने फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी आईपीओ पेश करने जा रही है। हुंडई इंडियन मार्केट का सबसे बड़ा आईपीओ था। इससे पहले 2022 में LIC ने 21,000 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया था।