Promotor's Stake Sale Good or Bad: देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में तेजी का फायदा उठाया। उन्होंने कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि यह मार्केट के हाई लेवल पर पहुंचने का संकेत है और निवेशकों को इससे घबराहट भी होती है। हालांकि एडलवाइज ग्रुप के को-फाउंडर राशेश शाह (Rashesh Shah) का मानना है कि प्रमोटर अपनी हिस्सेदारी हल्की कर रहे हैं तो यह एक फायदेमंद बदलाव है। उन्होंने ये बातें मनीकंट्रोल के 'मार्केट्स की धड़कन' में कही। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी वैश्विक औसत की तुलना में अधिक है जिसे घटाना इंस्टीट्यूशनल ओनरशिप और गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए फायदेमंद है। उनका मानना है कि अगर सभी कंपनियों के प्रमोटर्स 80 प्रतिशत या 75 प्रतिशत के मालिक होते, तो मैं निवेशकों की भागीदारी इतनी व्यापक न होती।
