Strategy amid Market Big Sell-off: भारतीय स्टॉक मार्केट में इस समय हाहाकार मचा हुआ है। निवेशक घबराए हुए हैं। वहीं मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल के मुताबिक मार्केट की तेज गिरावट वास्तव में लॉन्ग-टर्म निवेशकों के रिटर्न को मजबूत कर सकती है। उन्होंने ये बातें मनीकंट्रोल ग्लोबल वेल्थ समिट में कही। उन्होंने कहा कि अगर मार्केट मौजूदा लेवल से 10% और गिरता है, तो अगले पांच वर्षों में रिटर्न सालाना करीब 17–18% तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले बाजार की तेज गिरावटों के बाद मजबूत लॉन्ग-टर्म कंपाउंडिंग साइकिल आई है। कोरोना महामारी के बाद अगले वर्षों में मार्केट ने करीब 21-22% का कंपाउंडेड रिटर्न दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के समय में यदि निवेशक अच्छी कंपनियों का सही पोर्टफोलियो बनाते हैं, तो रिटर्न और भी अधिक हो सकता है। ऐसे समय में चुनी हुई कंपनियों का पोर्टफोलियो 30–35% तक का रिटर्न भी दे सकता है।
निवेश के लिए अपनाएं यह स्ट्रैटेजी
रामदेव अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि लंबी अवधि के निवेश का मतलब यह नहीं है कि किसी स्टॉक को हमेशा के लिए पकड़े रखा जाए। उनका कहना है कि कंपनियां भी इंसानों की तरह ग्रोथ, मेच्योरिटी और गिरावट के अलग-अलग चरणों से गुजरती हैं इसलिए निवेशकों को उन कंपनियों में निवेश बनाए रखना चाहिए जो तेजी से बढ़ने के चरण में हों। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि में एसेट्स बनाने के लिए जरूरी है कि मजबूत कंपनियों को शुरुआती चरण में पहचाना जाए और उनकी ग्रोथ अवधि के दौरान निवेश बनाए रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि सफल निवेश को बहुत जल्दी बेच देने से कंपाउंडिंग का फायदा कम हो जाता है।
निवेशकों की इस गलती का किया जिक्र
रामदेव अग्रवाल का कहना है कि कई निवेशक किसी कंपनी का मूल्यांकन शॉर्म टर्म में शेयरों की चाल को लेकर करते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में दो तरीके की मशीन है- वैल्यू मशीन और प्राइस मशीन। कई निवेशक सिर्फ कीमत के आधार पर ही मान लेते हैं कि कंपनी खराब हो गई है जबकि शॉर्ट टर्म की गिरावट से यह नहीं तय होता कि अंडरलाइंग बिजनेस में कोई गड़बड़ी है। उनका मानना है कि अगर किसी कंपनी के शेयरों में दो से तीन साल की गिरावट हो रही हो, तो भी कंपनी अच्छा परफॉरमेंस जारी रख सकती है। रामदेव अग्रवाल का कहना है कि कई निवेशक किसी शेयर के वैल्यू पपर ध्यान देते हैं जबकि किसी बिजनेस के इंट्रिंसिक वैल्यू को समझना काफी जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी कंपनी के असली बिजनेस वैल्यू पर भरोसा रखना लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहद जरूरी है।
यहां दिख रहा रामदेव अग्रवाल को मौका
रामदेव अग्रवाल का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ₹50-₹100 लाख करोड़ का मौका बना सकता है। उन्होंने कहा कि अब अधिक से अधिक लोग डिजिटल और प्लेटफॉर्म-बेस्ड सर्विसेज की तरफ बढ़ रहे हैं, चाहे इसके लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़े। रामदेव के मुताबिक यह सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस सेक्टर की कंपनियां 70-100% की रफ्तार हासिल कर सकती हैं। हालांकि इस सेक्टर के कंपनियों की वैल्यू अभी तय करना कुछ मुश्किल है क्योंकि अभी उनकी कमाई उबर ही रही है लेकिन समय के साथ कुछ कंपनियां ऐसी भी हो सकती हैं जिनकी वैल्यू ₹25–₹40 लाख करोड़ की हो सकती है।
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