अगले 5 साल में 1,60,000 अंक को छू लेगा Sensex, गिरावट आने का न करें इंतजार: दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल

दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल (Raamdeo Agrawal) का कहना है कि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) अगले 5 साल में दोगुना होकर 1,60,000 के आंकड़े तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार में हर महीने SIP के जरिए 20,000 करोड़ से अधिक की राशि आ रही है, जो किसी क्रांति से कम नहीं है

अपडेटेड Jul 06, 2024 पर 3:59 PM
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BSE Sensex: दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने कहा कि सेंसेक्स हर साल लगभग 15% की दर से बढ़ रहा है

दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल (Raamdeo Agrawal) का कहना है कि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) अगले 5 साल में दोगुना होकर 1,60,000 के आंकड़े तक पहुंच सकता है। हमारे सहयोगी CNBC-TV18 के साथ एक बातचीत में अग्रवाल ने कहा कि सेंसेक्स हर साल लगभग 15% की दर से बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में हर महीने SIP के जरिए 20,000 करोड़ से अधिक की राशि आ रही है, जो अपने आप में किसी क्रांति से कम नहीं है। पेश हैं इंटरव्यू के संपादित अंश:

सवाल: कुछ साल पहले आपने हमें सेंसेक्स के 1,00,000 तक पहुंचने का लक्ष्य बताया था। आज हम 80,000 पर हैं। हमने इस अंतर को कम कर लिया है। अब हमें एक और बड़े लक्ष्य की जरूरत है। जब आप लक्ष्य के करीब आते हैं तो दूसरे लक्ष्य के लिए आपको एक बड़ी संख्या की जरूरत होती है।

जवाब: आप अगले 10 साल की बात करें, तो मैं आपको इसके भी बड़ी संख्या बताऊंगा। यह बस कंपाउंडिंग है, जिसे बढ़ते ही जाना है। मैंने अपना करियर जब शुरू किया, तब सेंसेक्स 100 पर था। 1980 में मैंने अपना पहला शेयर खरीदा, और उस समय सेंसेक्स 100 पर था। आज यह 80,000 है। 44 साल में इसके कंपाउंडिंग की दर 16.4% है। साल दर साल, 44 साल तक, मैंने इस बाजार को बढ़ते देखा है। पहले मुझे लगता था कि यह हर साल 15% की दर से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी ग्रोथ 16% से भी अधिक है।


इस दर पर सेंसेक्स हर 5 साल में दोगुना हो जाता है। जैसे 40,000 से 80,000 तक, यह 5 साल में ही हो गया। यानी लंबी अवधि में भी सेंसेक्स का रिटर्न 15-16% रहा है। इसलिए, यह मानने का कोई कारण नहीं है कि आगे चलकर इंडेक्स की ऐसी रफ्तार नहीं रहेगी। यह 14 हो सकता है, यह 16 भी हो सकता है। इसलिए, हमें बेस रेट को 15 पर ही रखनी चाहिए। इस दर से 2029 तक, हम 1,60,000 पर पहुंच जाएंगे। क्या यह एक बड़ी संख्या है या अभी हमें इसे फिर से दोगुना करना चाहिए?

सवाल: शेयर बाजार में इस समय छोटे निवेशक भी खूब पैसा लगा रहे हैं। इससे FIIs का बाजार पर कुछ असर कम हुआ है। यही कारण है कि यह बाजार उस स्थिति से बहुत अलग है जहां हम शायद 10-15 साल पहले थे। क्या यह आपको परेशान नहीं करता है कि शेयरों के पीछे इतना पैसा लगा हुआ है? क्या यह अपने आप में एक जोखिम है जिस पर लोग ध्यान नहीं देना चाहते हैं?

जवाब: इसमें परेशानी की क्या बात है? यह मेरे 40 साल के करियर की सबसे सुखद स्थिति है। देश की आबादी 140 करोड़ है। ऐसे में शेयर बाजार में कम से कम 50 करोड़ लोग तो होने ही चाहिए। शेयर बाजार अब अधिक समावेशी हो रहा है और रिस्क कैपिटल अब सिर्फ अमीर वर्ग से ही नहीं आ रहा है। आज देश की एक बड़ी SIP के जरिए 500 से लेकर 5000 रुपये तक हर महीने शेयर बाजार में निवेश कर रही है। इसके जरिए शेयर बाजार में हर महीने ₹20,000-22,000 या हर साल ₹240,000 करोड़ रुपये आ रहा है। यह अपने आप में एक बड़ी क्रांति है।

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