राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों का जवाब दिया है। ज्वेलरी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी ने कहा है कि रेगुलेटर ने 3 जून को जो अंतरिम ऑर्डर पारित किया है, उसका कोई आधार नहीं है। राजेश एक्सपोर्ट्स ने इस बारे में 4 जून की सुबह मनीकंट्रोल को बताया। रेगुलेटर ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। सेबी के आरोपों के बाद कंपनी के शेयर में 4 जून को लोअर सर्किट लग गया।
राजेश एक्सपोर्ट्स सेबी के आदेश का कर रही स्टडी
राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन एवं मैनेजिंड डायरेक्टर ने मनीकंट्रोल को बताया, "यह एक अंतरिम आदेश है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हम इसका (अंतरिम आदेश) अध्य्यन कर रहे हैं और इसका जवाब तैयार करेंगे।" यह पूरा मामला तब सामने आया जब सेबी ने 3 जून को राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया। यह ऑर्डर कंपनी और राजेश मेहता के खिलाफ जारी हुआ है।
सेबी ने शुरुआती जांच के बाद जारी किया आदेश
सेबी ने कहा है कि उसने वित्तीय हेराफेरी, फंड के इस्तेमाल में अनियमितता के शुरुआती संकेतों और जांच में असहयोग के बाद अंतरिम आदेश जारी किया। आरोप में कहा गया है कि कंपनी ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ाकर दिखाया। यह FY21-FY25 के दौरान कुल कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू का 99.80 फीसदी है।
रेगुलेटर ने कंपनी और प्रमोटर पर लगाया प्रतिबंध
रेगुलेर ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन मेहता पर प्रतिबंध भी लगाया है। दोनों अगले आदेश तक सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। सेबी ने मामले का नया फॉरेंसिक ऑडिट का भी आदेश दिया है। इस खबर का असर 4 जून को कंपनी के शेयरों पर दिखा। बाजार खुलते ही शेयर 5 फीसदी क्रैश कर गए, जिसके बाद लोअर सर्किट लग गया।
राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर बीते एक साल में 50% गिरा
सेबी ने इस मामले में अभी सिर्फ अंतरिम आदेश जारी किया है। वह इस मामले की व्यापक जांच करेगा। उसके बाद फाइनल आदेश जारी करेगा। इस बीच कंपनी और उसके प्रमोटर को अपना पक्ष रखने का मौका देगा। उन्हें रेगुलेटर के सवालों के जवाब भी देने पड़ेंगे। बीते एक साल में राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर करीब 50 फीसदी गिरा है।