Rakesh Jhunjhunwala की तरह शेयरों से करोड़ों कमाना चाहते हैं? जानिए किस फॉर्मूले का वह करते थे इस्तेमाल

Rakesh Jhunjhunwala ने सिर्फ 5,000 रुपये से निवेश की शुरुआत की थी। तब सेंसेक्स सिर्फ 150 अंक पर था। उन्होंने 1986 में पहली बार Tata Tea के शेयरों में निवेश किया था

अपडेटेड Oct 13, 2022 पर 5:29 PM
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बिग बुल ने 1984 में ही शेयर ट्रेडिंग में करियर बनाने का फैसला कर लिया था।

Rakesh Jhunjhunwala: दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) ने शेयरों से अकूत संपत्ति कमाई। वह लाखों निवेशकों के रोल मॉडल थे। इस साल अगस्त में अचानक उनके देहांत से निवेशकों को बहुत निराशा हुई। कई गुना रिटर्न देने वाले शेयरों की पहचान करने में उन्हें महारत हासिल थी। कंपनियों के कारोबार की उनकी जैसी समझ बहुत कम लोगों में होती है। इसीलिए उन्हें 'बिग बुल' कहा जाता था। उन्हें इंडिया का वॉरेन बफे भी कहा जाता था।

उनकी कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सिर्फ 5,000 रुपये से निवेश की शुरुआत की थी। तब सेंसेक्स सिर्फ 150 अंक पर था। उन्होंने 1986 में पहली बार Tata Tea के शेयरों में निवेश किया था। तब वह कॉलेज में थे। अभी उनका नेटवर्थ 5.8 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुका है।

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बिग बुल ने 1984 में ही शेयर ट्रेडिंग में करियर बनाने का फैसला कर लिया था। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई की। फिर उन्होंने स्टॉक्स और शेयरों के बारे में व्यापक स्टडी की। स्टडी के दौरान उन्होंने एक फॉर्मूला बनाया। उन्होंने इस फॉर्मूले का खूब इस्तेमाल किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में बताया था। यह फॉर्मूला अर्निंग पर शेयर (EPS) और प्राइस अर्निंग रेशियो (PER) पर आधारित है। यह फॉर्मूला है Earnings per share (EPS) x price-earnings ratio (PER) = price। यह फॉर्मूला यह बताता है कि दोनों वेरिएबल का शेयरों की कीमतों में बड़ा हाथ होता है। जब किसी शेयर का EPS और PER बढ़ता है तो शेयर की कीमत रफ्तार पकड़ लेती है।

झुनझुनवाला ने बताया था कि शेयरों से होने वाला प्रॉफिट ऐसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है, जो डायनेमिक होते हैं। इसका मतलब है कि उनमें बदलाव होता रहता है। बिग बुल ने किसी शेयर के कुल प्रॉफिट पर फोकस करने के बजाय यह समझने की कोशिश की कि वे कौन से कारण और स्थितियां हैं, जिनकी वजह से यह प्रॉफिट बढ़ता है। उन्होंने बताया था कि किसी शेयर की EPS तीन चीजों पर निर्भर करती है। इसमें कंपनी का अकाउंटिंग प्रैक्टिस, प्रॉफिट का कैश प्रोफाइल और रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉयड शामिल हैं।

बिग बुल ने बताया था कि किसी कंपनि के शेयरों के ईपीएस और पीईआर का अंदाजा लगाने के लिए रियल लाइफ बिजनेस को समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया था कि ईपीएस का अंदाजा लगाना साइंस और आर्ट दोनों है।

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