बाजार की नजर RBI पर है। कल बैंकिंग सिस्टम में RBI 86,000 करोड़ रुपए डालने जा रहा है। ये अबतक का सबसे बड़ा लिक्विडिटी इंफ्यूजन है। दरअसल जब से नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कार्यभार संभाला है तब से बैंकिंग सिस्टम में नकदी डालने के लिए RBI एक्शन मोड में है। नए गवर्नर संजय मल्होत्रा सिस्टम में नकदी डालने में जुटे हैं। RBI ने 29 नवंबर 2024 तक सिस्टम से 49,611 करोड़ रुपए निकाले थे। 20 फरवरी 2025 तक RBI ने सिस्टम में 1.77 लाख करोड़ रुपए डाले हैं। कई बड़े कदम उठाकर RBI गर्वनर ने सिस्टम में नकदी डाले हैं।
कल RBI का सबसे बड़ा एक्शन
नकदी डालने के लिए बैंकिंग सिस्टम में कल RBI 86,000 करोड़ रुपए डालेगा। RBI 3 साल टेन्योर का डॉलर/रुपया स्वैप करेगा। सिस्टम में रुपये की लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ये कदम उठाया जा रहा है। 31 जनवरी को RBI ने करीब 5 अरब डॉलर का स्वैप किया था
नकदी बढ़ाने के लिए RBI के दूसरे बड़े कदमों की बात करें तो OMO ऑक्शन के जरिए RBI ने 1 लाख करोड़ रुपए के सरकारी बॉन्ड खरीदे हैं। मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट घटाकर 6.25 फीसदी किया है। LCR नियम 1 साल टालकर बैंकों को बड़ी राहत दी गई है। अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के तहत ECL नियम टाले गए हैं। कोटक बैंक पर RBI ने क्रेडिट कार्ड को लेकर सभी रोक हटा लिए हैं।
सिस्टम में नकदी बढ़ाने के सबसे ताजे कदम के तहत RBI ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को दिए जाने वाले बैंक ऋणों पर रिस्क वेटेज बढ़ाने के अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया है। अब बैंकों की ओर से NBFCs को दिए जाने वाले लोन पर रिस्क वेटेज 125 फीसदी से घटाकर वापस 100 फीसदी कर दिया गया है। इसका मतलब ये है कि ज्यादा जोखिम वाले लोन पर कुछ समय पहले कसी गई लगाम अब थोड़ा ढ़ीली कर दी गई है। नया रिस्क वेटेज 1 अप्रैल से लागू होगा।
यह एक ऐसा कदम है जिससे बैंकों को बड़ी मात्रा में नकदी मिलेगी जिसका इस्तेमाल वे कर्ज देने के लिए कर सकेंगे। यह सिस्टम में नकदी बढ़ाने के नजरिए से RBI का एक अहम फैसला है। इसके अलावा कंज्यूमर क्रेडिट पर भी रिस्क वेटेज घटाया गया है। कम रिस्क वेट (जोखिम भार) का मतलब है कि बैंकों को अब हाई रिस्क लोन वाल ऋणों के लिए कम पूंजी का प्रावधान करना होगा, इससे बैंकों की ऋण देने की क्षमता में सुधार होगा।
नुवामा के विश्लेषकों का मानना है कि नीति में इस बदलाव का बैंक लोन ग्रोथ पर पॉजिटिव असर पड़ेगा और इससे आने वाले महीनों में बैंकिंग सिस्टम में नकदी की मात्रा में इजाफा होगा।