आरबीआई ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने इसका ऐलान 9 अक्टूबर को किया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिसके बाद आरबीआई को एक्शन लेना पड़ा।
आरबीआई ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने इसका ऐलान 9 अक्टूबर को किया। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिसके बाद आरबीआई को एक्शन लेना पड़ा।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए सोमवार से स्पेशल विंडो
RBI तीन सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की रोजाना की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए एक स्पेशल विंडो ओपन करेगा। इससे स्पॉट मार्केट में रुपये पर दबाव में कमी आएगी। कई बार रुपये पर दबाव ज्यादा बढ़ने पर आरबीआई ऑयल कंपनियों को सीधे अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की सप्लाई करता है।
सीधे आरबीआई से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मिलेंगे डॉलर
केंद्रीय बैंक के इस कदम से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum 12 अक्टूबर यानी मंगलवार से सीधे आरबीआई के स्पेशल विंडो से डॉलर ले सकेंगे। आरबीआई ने यह भी कहा है कि फॉरेक्स डीलर्स यूजहर्स को किसी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव्स रीबुक करने की इजाजत नहीं देंगे।
एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट घटी
आरबीआई ने रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में पोजीशन की लिमिट 10 करोड़ डॉलर 50 लाख डॉलर कर दी है। केंद्रीय बैंक ने फॉरेक्स डीलर्स को रुपये से जुड़े सभी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए 'फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व' बनाए रखने को कहा है। यह हर ट्रांजेक्शन के नोशनल अमाउंट के 20 फीसदी के बराबर होगा।
डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंचा
बीते कुछ सत्रों में डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव दिखा है। 9 अक्टूबर यानी शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 96.73 के लेवल पर बंद हुआ। यह 8 अक्टूबर के रुपये के क्लोजिंग लेवल जितना है। यह डॉलर के मुकाबले रुपया के अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। इस साल मई में डॉलर के मुकाबले रुपया 96.96 के लेवल पर आ गया था। यह डॉलर के मुकाबले रुपया का सबसे निचला स्तर है।
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RBI के कदमों से रुपये में उतार-चढ़ाव में आ सकती है कमी
मुंबई में एएनजेड बैंक के फॉरेक्स स्ट्रेटेजिस्ट धीरज निम ने कहा कि ऑयल कंपनियों की डॉलर की मांग पूरी करने के लिए स्पेशल विंडो के ऐलान से फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की मांग का एक बड़ा स्रोत खत्म हो गया है। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव में कमी आएगी, लेकिन इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार घटेगा।
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