RBI उम्मीद से ज्यादा बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट, होम लोन और कार लोन होंगे महंगे

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू होगी। इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार यानी 7 अक्तूबर को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेंगे

अपडेटेड Sep 29, 2026 पर 2:21 PM
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नोमुरा का कहना है कि आरबीआई अक्तूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स और दिसंबर की पॉलिसी में फिर 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उम्मीद से ज्यादा इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ा सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी अगले हफ्ते आने वाली है। इसमें इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला हो सकता है।

आरबीआई 7 अक्टूबर को पेश करेगा मॉनेटरी पॉलिसी

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू होगी। इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार यानी 7 अक्तूबर को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेंगे। नोमुरा के मुताबिक, RBI का रुख इंटरेस्ट रेट को लेकर अनुमान से ज्यादा आक्रामक हो सकता है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई अगले साल तक इंटरेस्ट रेट करीब 125 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है।


इस साल दो बार रेपो रेट बढ़ने का अनुमान 

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई अक्तूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स और दिसंबर की पॉलिसी में फिर 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट बढ़कर 5.75 फीसदी पर पहुंच जाएगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, आरबीआई का रुख शुरुआत में आक्रामक रह सकता है। इसकी वजह यह है कि फूड और एनर्जी की कीमतों में उछाल से अगले छह महीनों में इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।

इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए RBI बढ़ाएगा रेपो रेट

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने का मकसद सिर्फ इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकना है। इसे इंटरेस्ट रेट को लेकर आरबीआई की सख्त नीति की साइकिल की शुरुआत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ब्रोकरेज फर्म ने FY27 में एवरेज सीपीआई इनफ्लेशन 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। उसका यह भी कहना है कि FY28 में यह घटकर 4 फीसदी के आरबीआई के टारगेट तक आ जाएगा।

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क्रूड की कीमतों में उछाल से बढ़ रहा है इनफ्लेशन 

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल आया है। जून में क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी आई थी। लेकिन, फिर से कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। इसका सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ रहा है। बीते 3-4 महीनों से रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ा है। अमेरिका-ईरान की लड़ाई से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर प्रति बैरल था।

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