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RBI monetary policy : वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही तक ब्याज दर में किसी भी तरह की ढील की संभावना नहीं : एक्सपर्ट्स

RBI monetary policy: आरबीआई ने लगातार सातवीं नीतिगत समीक्षा में अपनी दरों को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। कोर महंगाई में नरमी से राहत मिली है लेकिन खाद्य महंगाई पर अनिश्चितता चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा हाई यूएस बॉन्ड यील्ड, तेल की कीमतों में बढ़त और दूसरी वस्तुओं के साथ-साथ फेड की दर कटौती में संभावित देरी एमपीसी को सावधान रखेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 05, 2024 पर 12:46 PM
RBI monetary policy : वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही तक ब्याज दर में किसी भी तरह की ढील की संभावना नहीं : एक्सपर्ट्स
पॉलिसी के बाद बाजार का फोकस जून में अमेरिकी फेडरल रिजर्व दर में कटौती की बढ़ती संभावना और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे ग्लोबल फैक्टर पर केंद्रित हो गया है

RBI monetary policy: RBI ने आज वित्त वर्ष 2025 की पहली पॉलिसी जारी कर दी है। RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 6.50 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। MSF और बैंक रेट भी 6.75 फीसदी पर बरकरार रखे गए हैं। MPC सदस्यों में 5-1 की सहमति से ये फैसला लिया है। इसके साथ ही 'WITHDRAWAL OF ACCOMMODATION’ यानी उदार मौद्रिक नीति को वापस लेने का रुख भी बरकरार रखा गया है। आज की आरबीआई पॉलिसी एक्सपर्ट्स के नजरिए से कैसी रही आइए डालते हैं इस पर एक नजर।

मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर और सीईओ निश भट्ट की राय

मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर और सीईओ निश भट्ट ने कहा आरबीआई ने लगातार सातवीं नीतिगत समीक्षा में अपनी दरों को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। एकोमोडेटिव रुख को वापस लेने के नजरिए में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि आरबीआई महंगाई पर फोकस कर रहा है और इसे 4 फीसदी के लक्ष्य तक लाने को सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है।

हालांकि, बढ़ते जियोपोलिटिकल जोखिम से जुड़ी अनिश्चितताओं, खाद्य कीमतों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि ये लगातार चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। इनकी वजह से महंगाई के बढ़ने का जोखिम है जो डिफ्लेशन (अवस्फीति) की स्थिति पैदा करके गाड़ी को पटरी से उतार सकते हैं।

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