आरबीआई 6 दिसंबर को इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करने का ऐलान कर सकता है। हालांकि, जीडीपी ग्रोथ में तेज गिरावट को देखते हुए वह लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कुछ उपाय कर सकता है। ब्लूमबर्ग के सर्वे के नतीजों से यह पता चला है। इस सर्वे में शामिल 50 इकोनॉमिस्ट्स में से ज्यादातर का यह मानना था कि दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा। अभी रेपो रेट 6.5 फीसदी है। कुछ इकोनॉमिस्ट्स का मानना था कि केंद्रीय बैंक कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में कमी कर सकता है। यह मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी का संकेत होगा।
इनफ्लेशन अब भी टारगेट से ज्यादा
RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास इंटरेस्ट रेट में जल्द कमी की संभावना को खारिज कर चुके हैं। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में अपने रुख को न्यूट्रल कर दिया था। इनफ्लेशन अब भी RBI के 4 फीसदी के टारगेट से ज्यादा है। हालांकि, सितंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.4 फीसदी रह जाने से यह माना जा रहा है कि आरबीआई की सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का खराब असर इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ रहा है।
वित्तमंत्री इंटरेस्ट घटाए जाने के पक्ष में
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण और कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कुछ समय पहले कहा था कि इंटरेस्ट रेट में कमी होनी चाहिए। कुछ इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि आरबीआई को क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने के लिए कुछ और उपाय करने चाहिए। ऐसे में आरबीआई गवर्नर पर एक तरफ इनफ्लेशन को काबू में करने का दबाव है तो दूसरी तरफ ग्रोथ बढ़ाने का चैलेंज है। अगले हफ्ते गवर्नर के रूप में उनका छह साल का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। अभी उनका कार्यकाल बढ़ाए जाने के बारे में कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं।
ग्रोथ बढ़ाने के उपाय कर सकता है आरबीआई
निर्मल बंग इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में इकोनॉमिस्ट टेरेसा जॉन ने कहा, "हमारा मानना है कि एमपीसी की पॉलिसी में बदलाव देखने को मिल सकता है। सुस्त पड़ते ग्रोथ को देखते हुए आरबीआई की तरफ से उपाय जरूरी लगते हैं।" हालांकि, उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक अब अगले साल ही इंटरेस्ट रेट में कमी करेगा। लेकिन, इंटरेस्ट रेट में कमी की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता। आरबीआई अपने फैसले से चौंका सकता है।
ग्रोथ के अनुमान को घटा सकता है RBI
इकोनॉमिस्ट्स का कहना है कि 6 दिसंबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में FY25 में ग्रोथ के अपने अनुमान में कमी कर सकता है। उसने इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। लेकिन, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ में तेज गिरावट को देखते हुए 7.2 फीसदी ग्रोथ का अनुमान ज्यादा लगता है। गोल्डमैन सैक्स ने FY25 में जीडीपी ग्रोथ 6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। यह पहले के 6.4 फीसदी के अनुमान से कम है।