RBI Monetary Policy: आरबीआई 5 जून यानी शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 3 जून को शुरू हुई। आरबीआई की यह मॉनेटरी पॉलिसी ऐसे वक्त आ रही है, जब हालात काफी मुश्किल हैं। क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लगी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है। महंगाई बढ़ने का खतरा है। अल नीनो की वजह से इस बार मानसून में बारिश कम होने का अनुमान है। सवाल है कि आरबीआई शुक्रवार को रेपो रेट बढ़ाएगा या इसे अपरिवर्तित बनाए रखेगा?
रायटर्स के पोल में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट में किसी तरह का परिवर्तन नहीं करेगा। लेकिन, ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप्स जैसे कुछ मार्केट इंडिकेटर्स रेपो रेट बढ़ने का संकेत दे रहे हैं।
ट्रेडर्स और एनालिस्ट्स का मानना है कि तीन तरह की स्थितियां बनती दिख रही हैं। उन्होंने हर स्थिति में मार्केट की प्रतिक्रिया का भी अंदाजा लगाया है।
1. इंटरेस्ट रेट अपरिवर्तित रहेगा, रुख आक्रामक होगा
आरबीआई रेपो रेट को अपरिवर्तित बनाए रख सकता है। लेकिन, वह आगे सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दे सकता है। वह अपना रुख "न्यूट्रल" से बदलकर 'विड्रॉल ऑफ एकॉमोडेशन' कर सकता है। रेपो रेट स्थिर रहने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन, ट्रेडर्स का मानना है कि आरबीआई स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
रेपो रेट अपरिवर्तित रहने पर शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स में मजबूती आ सकती है। लेकिन, लंबी अवधि के बॉन्ड्स पर दबाव दिख सकता है। एएनजेड में फॉरेक्स स्ट्रेटेजिस्ट धीरज निम ने कहा कि आगे इनफ्लेशन बढ़ने की चिंता से लंबी अवधि के बॉन्ड पर दबाव दिख सकता है।
ट्रेडर्स का मानना है कि ऐसा होने पर 5 बेसिस प्वाइंट्स से ज्यादा का बदलाव नहीं दिखेगा। रेपो रेट नहीं बढ़ने पर शेयर बाजार में ज्यादा प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिलेगी। लेकिन, अगर केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन के अपने अनुमान को बढ़ाता है तो तो आगे मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने की संभावना बढ़ेगी।
2. रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ेगा, रुख में बदलाव नहीं होगा
रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने पर रुपये को सहारा मिल सकता है। इससे मार्केट में यह संकेत जाएगा कि केंद्रीय बैंक की दिलचस्पी रुपये को गिरने से बचाने में है। इस स्थिति में 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.15 फीसदी के पार जा सकती है। शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है, क्योंकि रियल एस्टेट, फाइनेंशियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी शेयरों पर दबाव बढ़ जाएगा।
3. रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ेगा, रुख में भी बदलाव
अगर रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने के साथ ही आरबीआई अपने रुख में भी बदलाव करता है तो इससे रुपये को काफी सहारा मिलेगा। तीन एनालिस्ट्स ने बताया कि ऐसा होने पर डॉलर के मुकाबले रुपया 94.80 के लेवल पर आ सकता है। हालांकि, इसके लिए आरबीआई को रुपये को सहारा देने के लिए कुछ उपायों के भी ऐलान करने होंगे। बॉन्ड ट्रेडर्स का कहना है कि इससे 10 साल के बॉन्ड की यील्ड शॉर्ट टर्म में 7.15-7.20 फीसदी के बीच रह सकती है।
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