RBI MPC Meeting Highlights: रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर कमर्शियल बैंकों को RBI से लोन मिलता है और इसके लिए वे सरकारी सिक्योरिटीज को गिरवी रखते हैं। रेपो दर में बदलाव न किए जाने के फैसले से होम लोन, व्हीकल लोन जैसे लोन्स की मासिक किश्त यानि EMI जस-की-तस बने रहने की संभावना है
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की जून महीने की मीटिंग के फैसले सामने आ गए हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने आज, 5 जून को मीटिंग खत्म होने के बाद जानकारी दी कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है। विशेषज्ञों का भी यही मानना था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की जून महीने की मीटिंग के फैसले सामने आ गए हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने आज, 5 जून को मीटिंग खत्म होने के बाद जानकारी दी कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है। विशेषज्ञों का भी यही मानना था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर पैदा हुई चुनौतियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो रेट को जस का तस छोड़ सकता है।
RBI ने इसके साथ मौद्रिक नीति रुख को तटस्थ यानि न्यूट्रल बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में एडजस्टमेंट को लेकर फ्लेक्सिबल बना रहेगा। रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर कमर्शियल बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। रेपो दर में बदलाव न किए जाने के फैसले से होम लोन, व्हीकल लोन जैसे लोन्स की मासिक किश्त यानि EMI जस-की-तस बने रहने की संभावना है।
RBI ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। यह पहले 4.6 प्रतिशत रखा गया था। RBI गवर्नर का कहना है कि चालू वित्त वर्ष के लिए कोर इनफ्लेशन 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अप्रैल की मीटिंग में MPC ने वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को पहले के 7.4% से घटाकर 6.9% कर दिया था। यह बदलाव मुख्य रूप से ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधाओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण किया गया। Q1 में ग्रोथ रेट 6.8%, Q2 में 6.7%, Q3 में 7% और Q4 में 7.2% रहने का अनुमान जताया गया था।