भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने बुधवार 8 फरवरी को एक बार फिर रेपो रेट (Repo Rate) में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की। इससे घर खरीदरों के लिए EMI का बोझ बढ़ जाएगा। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बुधवार को रियल एस्टेट सेक्टर (Realty Stocks) से जुड़े शेयरों में गिरावट देखी गई। हालांकि बाजार को पहले से रेपो रेट में बढ़ोतरी का अनुमान था, इसके बावजूद रियल एस्टेट शेयरों का लुढ़कना जारी रहा। फोनिक्स मिल्स (Phoenix Mills) के शेयरों में सबसे अधिक करीब 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा सनटेक रियल्टी (Sunteck Realty), प्रेस्टिज एस्टेट्स (Prestige Estates), ब्रिगेड एंटरप्राइजेज (Brigade Enterprises) और ओबरॉय रियल्टी (Oberoi Realty) के शेयरों में अच्छी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स भी 1 फीसदी से अधिक गिर गया था।
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म, एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पूरी ने बताया, "आज की बढ़ोतरी के बाद होम लोन पर ब्याज दरें 9.5 प्रतिशत के निशान को पार कर सकती हैं। ऐसे में हमें किफायती और लोअर मिड-रेंज के घरों की बिक्री पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता हैं क्योंकि ये लागत को लेकर अधिक सचेत रहते हैं।" उन्होंने "किफायती सेगमेंट में पहले से ही सुस्ती देखी जा रही थी और अब घर खरीदने की लागत में बढ़ोतरी से इस पर और असर पड़ सकता है।"
रेपो रेट में बदलाव रियल एस्टेट सेक्टर में मांग को कई तरह से प्रभावित करती है। चूंकि अधिकतर होम लोन की दरें अब रेपो रेट से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में RBI जब भी ब्याज दरें बढ़ाता है तो उसके साथ बैंक भी अपनी होम लोन की दरें महंगी कर देते हैं। इससे घर खरीदना महंगा हो जाता है, जो घरों की मांग को कम कर सकती है।
इसके अलावा मॉनिटरी पॉलिसी बाजार में पैसों की सप्लाई को प्रभावित करती है। रेपो रेट बढ़ने के साथ बाजार में मौजूदा पैसा घटता है, जिससे लोन महंगा हो जाता है और लोग अपने खर्चों में कटौती करने शुरू कर देते हैं, जो घरों की मांग को कम कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ रेपो घटने से बाजार में अधिक पैसा आता है और यह घरों की मांग को बढ़ा देता है।
स्टर्लिंग डेवलपर्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, रमानी शास्त्री भी इस बात से सहमत थे कि रेपो रेट में बढ़ोतरी निश्चित रूप से घरों की मांग को प्रभावित करेगी।
उन्होंने कहा, "बार-बार दरों में बढ़ोतरी का घरों की कुल मांग पर शॉर्ट-टर्म में असर पड़ता है। इससे खरीदारों की कुल अधिग्रहण लागत बढ़ जाती है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ समय से उछाल देखी जा रही थी। देश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी की मांग बढ़ी थी। हालांकि यह बढ़ोतरी एक बार फिर मांग को प्रभावित कर सकती है।"