आरबीआई ने इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। इसका ऐलान आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 9 अप्रैल को किया। इस वित्त वर्ष की पहली मॉनेटरी पॉलिसी पेश करते हुए उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में जीडीपी की ग्रोथ 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। पहले केंद्रीय बैंक ने इस वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
इस वित्त वर्ष के तिमाही अनुमान में भी कमी
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस वित्त वर्ष में इकोनॉमी की ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.5 फीसदी रह सकती है। दूसरी तिमाही में ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। तीसरी तिमाही में ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है। चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रह सकती है।
वैश्विक स्थितियों की वजह से घटाया ग्रोथ का अनुमान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले से यह माना जा रहा था कि RBI जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कमी करेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्थितियां हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में अपने पद की शपथ लेने के बाद से आक्रामक टैरिफ पॉलिसी अपनाई है। उन्होंने दुनिया के करीब 180 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि इसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा। इंडिया सहित कई देशों की इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है।
ट्रंप के टैरिफ से ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ घटेगी
मल्होत्रा ने कहा कि हाल में ट्रंप ने जिस तरह से टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, उससे ग्लोबल सेंटिमेंट को बड़ा धक्का पहुंचा है। इससे दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी है। ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर इसका खराब असर पड़ेगा। इससे इंडिया सहित दूसरे देशों की इकोनॉमी सुस्त पड़ सकती हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ में सुस्ती से कमोडिटी की कीमतों में नरमी आ सकती है। क्रूड में भी गिरावट के आसार हैं। हालांकि, इंडिया के लिए अच्छी बात यह है कि एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ अच्छी रह सकती है।
इंडिया की इकोनॉमी पर टैरिफ का कम असर पड़ेगा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ का इंडिया पर दूसरे देशों के मुकाबले कम असर पड़ेगा। यही वजह है कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 9 अप्रैल को इंडिया की FY26 की ग्रोथ के अनुमान में सिर्फ 0.2 फीसदी की कमी की है। ट्रंप ने इंडिया पर दूसरे देशों के मुकाबले कम टैरिफ लगाया है। दूसरा, चीन पर इंडिया से ज्यादा टैरिफ का मतलब है कि अमेरिकी मार्केट्स में इंडियन गुड्स की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ सकती है। इसलिए इंडिया को ट्रंप के टैरिफ से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।