इंडियन स्टॉक मार्केट में 5 अगस्त को बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 50 एक समय 3 फीसदी तक लुढ़क गया था। हालांकि, यह बाद में यह थोड़ा संभलने में कामयाब रहा। यही हाल सेंसेक्स का था। लेकिन, 7 अगस्त को मार्केट में रिकवरी दिखी। सेंसेक्स 1.11 फीसदी चढ़कर 79,468 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 1.27 फीसदी के उछाल के साथ 24,297 प्वाइंट्स पर क्लोज हुआ। पिछले कुछ समय से बड़ी गिरावट के बाद इंडियन मार्केट में जल्द रिकवरी दिखती है। लेकिन, इससे आपको नई धारणा बनाने की जरूरत नहीं है। आज इंडियन मार्केट्स के फंडामेंटल्स पिछले साल के मुकाबले अलग हैं।
26 फरवरी, 2021 को निफ्टी 3.76 फीसदी गिरा था। तब ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई थी। तेज इकोनॉमिक रिकवरी और इनफ्लेशन बढ़ने की उम्मीद की वजह से यील्ड बढ़ गई थी। तब मार्केट में जल्द रिकवरी की उम्मीद नहीं दिख रही थी। ऐसा लगा था कि अमेरिका में सरकार के पैकेज के तहत मिला पैसा अब खत्म हो चुका है। तब निफ्टी का पीई रेशियो 39.65 पहुंच गया था, जो इसके 10 साल के 21 के औसत से काफी ज्यादा था।
24 फरवरी, 2022 को निफ्टी 4.7 फीसदी गिरा था। दरअसल यह यूक्रेन पर रूस के हमलों पर मार्केट की प्रतिक्रिया थी। तब निफ्टी का पीई रेशियो 21.59 था, जो इसके 10 साल के 21 के औसत से थोड़ा ज्यादा था। लेकिन, अर्निंग्स में 42 फीसदी उछाल की वजह से निवेशक शेयरों में जमकर पैसे लगा रहे थे। एक महीना बाद ही इंडेक्स 6 फीसदी तक चढ़ गया था। इससे पता चलता है कि निवेशकों का इंडियन मार्केट्स पर पूरा भरोसा है। लेकिन, बाद में अमेरिका में इनफ्लेशन बढ़ने की खबर ने बाजार की हवा निकाल दी थी। हालांकि, इंडियन मार्केट्स की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी। MSCI Emerging Market Index 15.85 फीसदी गिर गया था। लेकिन, घरेलू निवेशकों ने इंडियन मार्केट में फरवरी 2022 से फरवरी 2023 के बीच अकेले 2,54,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
2024-घरेलू निवेशकों का दम
इस साल मार्केट में आई गिरावट कुछ अलग है। अभी निफ्टी का पीई रेशियो 24 है, जो इसके 10 साल के 22.4 के औसत से ज्यादा है। FY25 में अर्निंग्स ग्रोथ 12.5 फीसदी रहने का अनुमान है। अर्निंग्स ग्रोथ और निफ्टी के पीई रेशियो को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह हाई वैल्यूएशन और सामान्य ग्रोथ की स्थिति है। दरअसल दो साल तक शानदार ग्रोथ के बाद कंपनियों की अर्निंग्स की रफ्तार सुस्त पड़ रही है। इंडेक्स की वैल्यूएशन को लेकर भी चिंता दिख रही है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि BSE की टॉप 1000 कंपनियों में करीब 52 फीसदी में 25 से ज्यादा पीई पर ट्रेडिंग हो रही है। FY20 में यह 23 फीसदी था।
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अमेरिका में रिसेशन का डर बढ़ा है। जियोपॉलिटिकल के बारे में अनुमान लगाना कठिन है। ऐसे में निवेशकों को अपनी उम्मीदों को व्यावहारिक बनाए रखने की जरूरत है। निवेश जारी रखें लेकिन ऐसे रिटर्न के पीछ भागने से बचें जो मुमकिन नहीं है।