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उम्मीद से पहले आई रिकवरी, लेकिन जानिए यह बाजार किस तरह पिछले सालों के बाजार से अलग है

5 अगस्त को मार्केट में आई गिरावट से निवेशकों को बढ़ा झटका लगा था। 2 अगस्त को भी मार्केट में गिरावट आई थी। ऐसे में किसी ने इतनी जल्द रिकवरी की उम्मीद नहीं की थी। लेकिन, इससे निवेशकों को आत्मसंतुष्ट होने की जरूरत नहीं है। यह बाजार पिछले कुछ सालों के बाजार से कई तरह से अलग है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 07, 2024 पर 6:12 PM
उम्मीद से पहले आई रिकवरी, लेकिन जानिए यह बाजार किस तरह पिछले सालों के बाजार से अलग है
अभी निफ्टी का पीई रेशियो 24 है, जो इसके 10 साल के 22.4 के औसत से ज्यादा है। FY25 में अर्निंग्स ग्रोथ 12.5 फीसदी रहने का अनुमान है।

इंडियन स्टॉक मार्केट में 5 अगस्त को बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 50 एक समय 3 फीसदी तक लुढ़क गया था। हालांकि, यह बाद में यह थोड़ा संभलने में कामयाब रहा। यही हाल सेंसेक्स का था। लेकिन, 7 अगस्त को मार्केट में रिकवरी दिखी। सेंसेक्स 1.11 फीसदी चढ़कर 79,468 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 1.27 फीसदी के उछाल के साथ 24,297 प्वाइंट्स पर क्लोज हुआ। पिछले कुछ समय से बड़ी गिरावट के बाद इंडियन मार्केट में जल्द रिकवरी दिखती है। लेकिन, इससे आपको नई धारणा बनाने की जरूरत नहीं है। आज इंडियन मार्केट्स के फंडामेंटल्स पिछले साल के मुकाबले अलग हैं।

2021-अर्निंग्स में उछाल

26 फरवरी, 2021 को निफ्टी 3.76 फीसदी गिरा था। तब ग्लोबल स्टॉक मार्केट्स में बड़ी गिरावट आई थी। तेज इकोनॉमिक रिकवरी और इनफ्लेशन बढ़ने की उम्मीद की वजह से यील्ड बढ़ गई थी। तब मार्केट में जल्द रिकवरी की उम्मीद नहीं दिख रही थी। ऐसा लगा था कि अमेरिका में सरकार के पैकेज के तहत मिला पैसा अब खत्म हो चुका है। तब निफ्टी का पीई रेशियो 39.65 पहुंच गया था, जो इसके 10 साल के 21 के औसत से काफी ज्यादा था।

ग्रोथ मुश्किल से आधा फीसदी रह गई जिससे तब इकोनॉमी के संकट का पता चलता था। एक हफ्ते बाद मार्केट में 3 फीसदी उछाल आया था। लेकिन, बाजार में उतारचढ़ाव ने ट्रेडर्स को राहत की सांस नहीं लेने दिया था। लेकिन, उसके बाद का समय मार्केट के लिए अच्छा रहा। फॉरेन निवेशकों के इंडियन मार्केट से 2.73 लाख करोड़ रुपये निकाल लेने के बावजूद मार्केट ने 15.59 फीसदी रिटर्न दिया था। उभरते बाजारों में इंडिया का प्रदर्शन शानदार था। MSCI EM Index 12.49 फीसदी गिरा था। इंडियन मार्केट्स के अच्छे प्रदर्शन से निवेशकों का भरोसा मार्केट में बना हुआ था।

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