Reliance Industries Q3 Results : भारत की सबसे वैल्यूएबल कंपनी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने चालू फाइनेंशियल ईयर 2026 के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (Q3) के नतीजे घोषित कर दिए। आज आए नतीजों के मुताबिक डिजिटल सर्विसेज़, O2C और रिटेल बिज़नेस की मजबूती की वजह से Q3 FY26 में कंपनी की कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपयेपर रही है। पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में कंपनी का रेवेन्यू 2.67 लाख करोड़ रुपये रहा था।
तीसरी तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत बढ़कर 22,290 करोड़ रुपये पर रहा है। जबकि टैक्स से पहले का प्रॉफिट 3.7 प्रतिशत बढ़कर 29,697 करोड़ रुपये पर रहा है।
तीसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 6.1 प्रतिशत बढ़कर 50,932 करोड़ रुपये रहा है। डिजिटल सर्विसेज़ और O2C सेगमेंट कई कमाई में बढ़ोतरी से EBITDA को सपोर्ट मिला है।
कंपनी के ऑयल टू केमिकल (O2C) बिज़नेस को ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल क्रैक में तेज़ बढ़ोतरी से फायदा हुआ है। ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल क्रैक में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 62-106 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। O2C EBITDA पिछले साल की तुलना में 15 प्रतिशत बढ़कर 16,507 करोड़ रुपये रहा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "3Q FY26 में रिलायंस का कंसोलिडेटेड परफॉर्मेंस सभी बिज़नेस में लगातार फाइनेंशियल डिलीवरी और ऑपरेशनल मज़बूती को दिखाता है।"
जियो-बीपी फ्यूल रिटेलिंग बिजनेस में ग्रोथ रही जारी
जियो-बीपी फ्यूल रिटेलिंग बिजनेस ने भी अपना ग्रोथ मोमेंटम बनाए रखा। गैसोलीन और हाई-स्पीड डीजल की बिक्री में अच्छी ग्रोथ के चलते फ्यूल वॉल्यूम में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। रिटेल नेटवर्क का और विस्तार हुआ। दिसंबर के आखिर तस जियो-बीपी के 2,125 आउटलेट चालू थे, जो एक साल पहले के मुकाबले 14 प्रतिशत ज़्यादा हैं।
मुकेश अंबानी ने आगे कहा, "O2C बिज़नेस में मज़बूत ग्रोथ बेहतर डिमांड-सप्लाई डायनामिक्स और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के साथ काफी ज़्यादा फ्यूल मार्जिन की वजह से हुई है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे फ्यूल रिटेलिंग बिज़नेस में Jio-bp नेटवर्क के लगातार विस्तार के साथ ज़बरदस्त ग्रोथ हुई है।"
तेल और गैस बिज़नेस ने ओवरऑल परफॉर्मेंस पर डाला दबाव
इसके विपरीत कंपनी के तेल और गैस बिज़नेस ने ओवरऑल परफॉर्मेंस पर दबाव डाला है। KGD6 ब्लॉक के रिज़र्वॉयर में नेचुरल गिरावट और कम कीमत मिलने के साथ-साथ समय-समय पर होने वाली मेंटेनेंस गतिविधियों से जुड़े ज़्यादा ऑपरेटिंग खर्चों के कारण प्रोडक्शन से प्रभावित हुआ। इस सेगमेंट का EBITDA पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत घटकर 4,857 करोड़ रुपये पर रहा। वहीं, इसकी रेवेन्यू 8.4 प्रतिशत घटकर 5,833 करोड़ रुपये पर रही।
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