आखिर Remdesivir दवा है या दर्द, कोरोना पर इसका कैसा असर!

रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है। इबोला महामारी के दौरान इसका परीक्षण हुआ था.

अपडेटेड Apr 23, 2021 पर 8:34 AM
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जिस तरह से रेमडेसिविर (Remdesivir) के लिए देश में हल्ला मच रहा है। इस दवा की उपलब्धता और अंट-शंट कीमत की जो कहानियां समाने आ रही हैं। ये दवा से ज्यादा दर्द बन गई है। तो आज यहां हम रेमडेसिविर की ही पड़ताल करके ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर कितनी जरूरी है ये दवा और किस तरह के मरीज को दी जानी चाहिए।
 

रेमडेसिविर का भौकाल

डॉक्टर कर रहे धड़ल्ले से रेमडेसिविर  प्रिस्काइब कर रहे हैं। इसकी जमकर ब्लैक मार्केटिंग भी हो रही है। 3,000 रुपए का इंजेक्शन 30,000 रुपए में मिल रहा है। सरकार ने इसकी कीमत तय कर दी है। अभी 899 से लेकर 5400 तक इसका MRP है। 899 में जायडल कैडिला सबसे सस्ती है।

रेमडेसिविर का प्रोडक्शन

देश में 7 कंपनियां रेमडेसिविर बना रही हैं। इनकी रोज 1.30 लाख डोज की क्षमता है। 6 और कंपनियों को बनाने की मंजूरी मिली है। अप्रैल अंत तक डबल प्रोडक्शन की उम्मीद है।

रेमडेसिविर पर सरकार


रेमडेसिविर पर सरकार का पक्ष ये है कि ये कोरोना के लिए जीवनरक्षक दवा नहीं। कोरोना में  रेमडेसिविर गैरजरूरी है। इसके इस्तेमाल से फायदे की गारंटी नहीं है।

रेमडेसिविर की बंदरबांट

रेमडेसिविर की बंदरबांट पर बॉम्बे HC ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने केंद्र और राज्य दोनों को फटकार लगाई है। बॉम्बे HC ने केंद्र से पूछा है कि महाराष्ट्र ज्यादा दवा क्यों नहीं पा सकता है। महाराष्ट्र में हैं कोरोना के 40 फीसदी मरीज हैं।

क्या है रेमडेसिविर?

रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है। इबोला महामारी के दौरान इसका परीक्षण हुआ था। रेमडेसिविर कोरोना को ठीक करने की दवा नहीं है। ये कथित तौर पर शरीर में वायरस को बढ़ने से रोकती है। सरकार के मुताबिक रेमडेसिविर लाइफ सेविंग दवा नहीं है।

कितनी महत्वपूर्ण है रेमडेसिविर?

कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर चमत्कारी दवा नहीं है। रेमडेसिविर को सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर लेना ठीक है। ज्यादातर मरीजों को इसकी जरूरत नहीं होती। कुछ खास लक्षणों के बाद ही इंजेक्शन का प्रयोग होता है। जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल नीचे है उन्हें ही इसकी जरूरत होती है। खुद उपयोग से कुछ मरीजों को जान का खतरा संभव है। इससे कुछ मरीजों के हार्ट और लिवर पर साइड इफेक्ट संभव है।

रेमडेसिविर से बचेगी जान?

ये दावे के साथ नहीं कहा जा सकता। 2009 में US की गिलीड साइंस ने इसे बनाया था। ये वायरस को बढ़ने से रोकने का दावा करती है। ये हेपेटाइटिस के लिए बनाई गई थी। 2014 में इबोला के लिए इस्तेमाल हुआ। MERS और SARS में भी ये इस्तेमाल हुई है। ये दवा डोनाल्ड ट्रंप को भी दी गई थी। कोरोना के लिए 50 देशों में इस्तेमाल की जा रही है।

रेमडेसिविर पर WHO

रेमडेसिविर पर WHO का कहना है कि ये गंभीर परिस्थितियों में असर नहीं करती। दवा के कई सारे साइड इफेक्ट हैं।

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