कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भी शेयर बाजार में डीमैट खातों की संख्या में जोरदार बढ़त देखने को मिली है। इस लहर में खुदरा निवेशकों की एक ऐसी कटेगरी ने बाजार में कदम रखा है जिन्होंने न केवल लार्जकैप शेयरों के लिए बल्कि उन शेयरों पर भी दांव लगाया है जो कम समय में अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। यहां हमने ऐसे स्टॉक्स की एक सूचि तैयार की है जिनमें हाल के सालों में रिटेल निवेशकों ने खूब जनकर खरीदारी की है और जिनके पब्लिक शेयर होल्डर बेस में भारी बढ़त हुई है। आइए इन शेयरों पर डालते हैं एक नजर।
दीपक नाइट्राइट (Deepak Nitrite) : प्राइम डेटाबेस के आकंड़ों से पता चलता है कि पिछले चार सालों में दीपक नाइट्राइट के पब्लिक शेयर होल्डर बेस में 1200 फीसदी से ज्यादा की बढ़त हुई है। जबकि एफआईआई और डीआईआई कंपनी में आंशिक हिस्सेदारी बेच रहे हैं। दीपक नाइट्राइट के प्रमोटरों ने इस अवधि में अपनी हिस्सेदारी 45.69 फीसदी से बढ़ाकर 49.13 फीसदी कर ली है। 2021 में, स्टॉक 3000 रुपये के करीब पहुंच गया था जो 2019 में कोविड से पहले दर्ज किए गए स्तरों से लगभग 650 फीसदी ज्यादा है।
ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक (Olectra Greentech) : ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनी ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक में पब्लिक शेयर होल्डर बेस 1100 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। विदेशी संस्थागत निवेशक कंपनी की ओर आकर्षित हुए हैं। एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी लगभग 8.5 फीसदी तक बढ़ा दी है जो 2019 में केवल 3 फीसदी थी। दूसरी ओर, ओलेक्ट्रा के प्रमोटरों ने कंपनी में अपनी लगभग 11 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 50 फीसदी कर दी है। हैदराबाद स्थित ये कंपनी जेबीएम ऑटो, टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
टाटा पावर (Tata Power) : प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से इस स्टॉक में पब्लिक शेयरधारकों की संख्या में 1006 फीसदी की बढ़त हुई है। एफआईआई और डीआईआई कंपनी में शेयर बेच रहे हैं। दोनों ने टाटा पावर में अपनी हिस्सेदारी लगभग आधी कर दी है। सरकार ने भी शेयर बेचे हैं और वर्तमान में उसके पास कंपनी की लगभग 0.32 प्रतिशत हिस्सेदारी है। लगभग 81,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ पिछले 10 साल में कंपनी की सेल्स में सालाना आधार पर करीब 5 फीसदी की बढ़त हुई है।
केपीआर मिल (KPR Mill) : देश की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड अपेरल बनाने वाली कंपनियों में से एक, केपीआर मिल का पब्लिक शेयर होल्डिंग बेस 2019 के बाद से 981 फीसदी बढ़ गया है। जबकि प्रमोटरों और डीआईआई ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया है। वहीं, एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी लगभग 2 फीसदी बढ़ा दी है। बाजार जानकारों का सुझाव है कि यह उन कंपनियों में से एक है जिनको चीन+1 रणनीति से सबसे ज्यादा फायदा होगा।
अदाणी एनर्जी सोल्यूशंस लिमिडेट (Adani Energy solutions) : अहमदाबाद मुख्यालय वाली इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन कंपनी अदाणी एनर्जी सोल्यूशंस लिमिडेट में कोविड महामारी फैलने के बाद से पब्लिक शेयर होल्डिंग बेस 945 फीसदी बढ़ गया है। लगभग 88000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ पिछले 5 साल में कंपनी की सेल्स में सालाना आधार पर करीब 28 फीसदी की बढ़त हुई है। 2022 में इस शेयर ने लगभग 4000 रुपये की ऊंचाई को छुआ था लेकिन हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद से ये शेयर लगभग 700 रुपये तक गिर गया।
रेडिंगटन (Redington): इस कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनी के पब्लिक शेयर होल्डिंग बेस में 931 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है। पिछले चार वर्षों में एफआईआई ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 17 फीसदी बढ़ाकर 59.22 फीसदी कर ली है। डीआईआई ने भी रेडिंगटन में अपनी हिस्सेदारी में हल्की बढ़त की है।
Jubilant Foodworks (जुबिलेंट फूड वर्क्स) : भारत की लीडिंग फूड सर्विसेज कंपनियों में से एक और डोमिनोज़ ब्रांड नेम से कारोबार करने वाली जुबिलेंट फूड वर्क्स में पब्लिक शेयरहोल्डर बेस पिछले चार सालों में 930 फीसदी बढ़ गया है। ताजे आंकड़ों के मुताबिक कंपनी में एफआईआई और सरकार ने अपने शेयर बेच दिए हैं और डीआईआई ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर करीब 23 फीसदी कर ली है।
डिक्सन टेक (Dixon Tech) : देश की सबसे तेजी से ग्रोथ करती इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से एक, डिक्सन टेक में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी महामारी की शुरुआत के बाद से 845 फीसदी बढ़ गई है। एफआईआई भी कंपनी को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 4 फीसकी से ज्यादा बढ़ा दी है। इसी तरह DII ने भी अपनी हिस्सेदारी 2 फीसदी बढ़ाई है। हाल ही में, डिक्सन की सहायक कंपनी पैडगेट इलेक्ट्रॉनिक्स ने स्मार्टफोन बनाने के लिए Xiaomi के साथ एक समझौता किया। समझौते के मुताबिक Xiaomi के लिए फोन का उत्पादन उत्तर प्रदेश के नोएडा में पैडगेट की उत्पादन इकाई में किया जाएगा।
बालाजी एमाइंस (Balaji Amines) : प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि डीएमए-एचसीएल (डी मिथाइल एमाइन हाइड्रोक्लोराइड) की दुनिया की सबसे बड़ी उत्पादकों में से एक और एलिफैटिक एमाइन की उत्पादक कंपनी बालाजी एमाइंस में पब्लिक शेयर होल्डिंग 800 फीसदगी बढ़ गई है। 7000 करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप के वाली बालाजी की प्रतिस्पर्धी कंपनियों में पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, एसआरएफ, टाटा केमिकल्स और लिंडे इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। अगले 10 साल में कंपनी की बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 17 फीसदी बढ़त होने का अनुमान है।
रिलैक्सो फुटवियर्स (Relaxo Footwears) : प्राइम डेटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि भारत के सबसे बड़े फुटवियर ब्रांड में सार्वजनिक शेयरधारकों ने पिछले चार सालों में अपनी हिस्सेदारी में 800 फीसदी की बढ़त की है। फुटवियर इंडस्ट्री में रिलैक्सो का मुकाबला मेट्रो ब्रांड्स, बाटा इंडिया और कैंपस एक्टिववियर सहित तमाम दूसरी कंपनियों से है। पिछले 10 साल में कंपनी की बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 13 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है।