RBI डॉलर के मुकाबले रुपये पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर सकता है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखने को मिल सकती है। Citigroup और Barclays ने यह अनुमान जताया है। दरअसल, आरबीआई का सपोर्ट घटने पर रुपये पर दबाव बढ़ जाने के आसार हैं।
RBI डॉलर के मुकाबले रुपये पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कर सकता है। इससे डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखने को मिल सकती है। Citigroup और Barclays ने यह अनुमान जताया है। दरअसल, आरबीआई का सपोर्ट घटने पर रुपये पर दबाव बढ़ जाने के आसार हैं।
सिटी के डॉलर के मुकाबले रुपया के गिरकर 85 के स्तर पर आ जाने का अनुमान जताया है। बार्कलेज का कहना है कि रुपया 84-85 के स्तर तक गिर सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी डॉलर और रुपये के एक्सचेंज रेट का टारगेट बढ़ाकर 85 कर दिया था। रुपया के हाल में 83 का स्तर पार कर जाने के बाद उसने अपने टारगेट में बदलाव किया है।
पिछले कई महीनों से डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी देखने को मिल रही है। पिछले हफ्ते बुधवार को यह गिरकर 83 का स्तर पार कर गया। इससे यह बीते एक महीना में डॉलर के मुकाबले सबसे खराब प्रदर्शन वाली करेंसी हो गई है। गुरुवार को यह गिरकर 83.29 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप से इसमें थोड़ी मजबूती आई।
अगर रुपया गिरकर डॉलर के मुकाबले 85 के स्तर पर पहुंच जाता है तो इस साल इसकी कमजोरी 12.5 फीसदी होगी। यह एक दशक में डॉलर के मुकाबले रुपये में आई सबसे पड़ी कमजोरी होगी। आरबीआई नियमित रूप से डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी को रोकने के लिए हस्तक्षेप करता रहा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से गिरावट आ रही है।
सिटी के एनालिस्ट्स गौरव गर्ग और गोर्डन गोह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "उम्मीद है कि आरबीआई डॉलर और रुपये के एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव में कमी लाने के लिए हस्तक्षेप करेगा। लेकिन, ऐसा करना बहुत मुश्किल होगा। खासकर तब जब विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से कमी आ रही है।"
इंडिया का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले साल सितंबर के अपने पीक से 100 अरब डॉलर से ज्यादा घट चुका है। पिछले साल सितंबर में यह 642.5 अरब डॉलर था। विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट के वजह से अब यह सिर्फ 9 महीने के आयात के लिए पर्याप्त रह गया है। एक साल पहले यह 12 महीने के आयात के लिए पर्याप्त था।
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