Market cues : 24350 के ऊपर जाने पर निफ्टी में देखने को मिल सकती है 24600 तक की तेजी, 24000 पर अहम सपोर्ट
Market cues : बाजार जानकारों का कहना है कि Nifty के लिए 24000 का स्तर एक अहम जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 23800 की ओर नीचे जा सकता है और उसके बाद 23500 तक की गिरावट देखने को मिल सकती। हालांकि,अगर 24350 के ऊपर मज़बूत बढ़त देखने को मिलती है तो इंडेक्स 24600 की ओर बढ़ सकता है
Market cues :बाजार का मूड दिखाने वाला Nifty का पुट-कॉल रेश्यो 5 मई को बढ़कर 1.08 हो गया, जबकि पिछले सत्र में यह 0.80 था
Market cues : 5 मई को एक उतार-चढ़ाव भरे सत्र में Nifty 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ,लेकिन मोटे तौर पर यह 23,800–24,350 की रेंज के भीतर ही रहा। इसके अलावा लगातार आठवें सत्र में भी यह अपने शॉर्ट और मिड टर्म मूविंग एवरेज के आसपास ही घूमता रहा। भू-राजनीतिक तनाव और तेल की महंगी कीमतों का बाजार के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा। तकनीकी रूप से मोमेंटम इंडिकेटर्स मिले-जुले रहे। RSI 50 के आसपास स्थिर रहा,जबकि MACD हिस्टोग्राम में हरे बार्स सिकुड़ते हुए दिखाई दिए।
बाजार जानकारों का कहना है कि Nifty के लिए 24000 का स्तर (लगभग 20-दिन के EMA के आसपास) एक अहम जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 23800 की ओर नीचे जा सकता है और उसके बाद 23500 तक की गिरावट देखने को मिल सकती। हालांकि,अगर 24350 के ऊपर मज़बूत बढ़त देखने को मिलती है तो इंडेक्स 24600 की ओर बढ़ सकता है।
यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।
Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल
पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,923, 23,876 और 23,799
पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,075, 24,122 और 24,198
स्पेशल फॉर्मेशन : उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बीच,Nifty 50 ने डेली चार्ट पर एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसकी निचली शैडो लंबी थी। यह मामूली कमजोरी के बावजूद निचले स्तरों पर खरीदारी में दिलचस्पी का संकेत है। हालांकि,इंडेक्स मोटे तौर पर साइडवेज ही रहा और 23,800–24,350 के स्तरों के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। इंडेक्स ने लगातार छठे सत्र में क्लोजिंग बेसिस पर 20-दिन के EMA को बचाए रखा। 50.7 पर स्थित RSI सिग्नल लाइन के नीचे ही स्थिर रहा। वहीं MACD और सिग्नल लाइन के बीच का अंतर लगातार 11वें सत्र में भी कम होता गया,जो हरे हिस्टोग्राम बार्स के सिकुड़ने से साफ ज़ाहिर होता है। यह सब इस बात का संकेत है कि बाजार में किसी भी दिशा में मजबूत गति का अभाव है और यह लगातार एक ही दायरे में बना हुआ है।
बैंक निफ्टी
पिवट पॉइंट्स पर आधारित रेजिस्टेंस: 54,807, 54,965, और 55,219
पिवट पॉइंट्स पर आधारित सपोर्ट: 54,298, 54,140, और 53,885
फिबोनाची रिट्रेसमेंट पर आधारित रेजिस्टेंस: 55,809, 57,195
फिबोनाची रिट्रेसमेंट पर आधारित सपोर्ट: 53,687, 52,798
स्पेशल फॉर्मेशन : बैंक निफ्टी पिछले दिन के निचले स्तर के साथ-साथ 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट (अप्रैल की रैली का) से भी नीचे बंद हुआ। इसमें औसत से अधिक वॉल्यूम रहा और इसने डेली टाइमफ्रेम पर ऊपर और नीचे दोनों तरफ शैडो वाली एक बेयरिश कैंडल बनाई, जो कमजोरी का संकेत है। इसके अलावा, बैंकिंग इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड करता रहा,जिसमें शॉर्ट-टर्म और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज नीचे की ओर जाते दिखे।
10 डे EMA,20 डे EMA से नीचे गिर गया जो एक बेयरिश क्रॉसओवर का संकेत है। RSI घटकर 43.77 पर आ गया,जबकि MACD ने लाल हिस्टोग्राम बार्स में और विस्तार के साथ एक नेगेटिव क्रॉसओवर बनाए रखा। यह सब बढ़ते हुए बेयरिश रुझान और लगातार नीचे की ओर दबाव का संकेत देता है।
एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) 5 मई को शुद्ध विक्रेता बन गए और उन्होंने ₹3,621 करोड़ के शेयर बेच दिए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार आठवें सत्र में अपनी खरीदारी जारी रखी और इक्विटी बाज़ार में ₹2,600 करोड़ का निवेश किया,जिससे बाजार के सेंटिमेंट को कुछ हद तक सहारा मिला।
मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापने वाला India VIX नीचे गिरकर 17.9 के स्तर पर आ गया। इसमें 2.14 प्रतिशत की गिरावट आई और लगातार छठे सत्र में भी यह 50-डे और 100-डे के EMA के दायरे में ही बना रहा। बुल्स (खरीदारों) के लिए धीरे-धीरे सहज स्थिति में लौटने के लिए यह जरूरी है कि यह 17 के जोन से नीचे गिरे और वहीं टिका रहे।
पुट कॉल रेशियो
बाजार का मूड दिखाने वाला Nifty का पुट-कॉल रेश्यो (PCR) 5 मई को बढ़कर 1.08 हो गया, जबकि पिछले सत्र में यह 0.80 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।
F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक
F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं,जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।
एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं
एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: कोई नहीं
एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं
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