Rupee Vs Dollar: जून 2023 तक डॉलर के मुकाबले 85 के लेवल तक टूट सकता है रुपया, जानिए क्यों

Rupee : कैपिटल इकोनॉमिक्स के मुताबिक, आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती और जोखिम लेने की भूख कम होने के साथ ज्यादातर दूसरी करेंसीज की तुलना डॉलर और मजबूत होगा। रिसर्च हाउस ने इस महीने के अंत तक रुपये के 83 के स्तर से नीचे फिसलने, मार्च 2023 तक 84 और जून के अंत तक 85 तक जाने का अनुमान जताया है

अपडेटेड Dec 23, 2022 पर 11:55 AM
इस साल रुपये ने 83 का नया रिकॉर्ड लो बनाया है, लेकिन दूसरे देशों की तुलना में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है

Rupee Vs Dollar: रुपये में बड़ी कमजोरी देखने को मिल सकती है और हाल के सुधार के दौर के बाद अगले साल डॉलर की तुलना में 85 के रिकॉर्ड लो तक जा सकता है। कैपिटल इकोनॉमिक्स (Capital Economics) ने अपनी एक रिपोर्ट में यह आशंका जाहिर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती और जोखिम लेने की भूख कम होने के साथ ज्यादातर दूसरी करेंसीज की तुलना डॉलर और मजबूत होगा। रिसर्च हाउस ने इस महीने के अंत तक रुपये के 83 के स्तर से नीचे फिसलने, मार्च 2023 तक 84 और जून के अंत तक 85 तक जाने का अनुमान जताया है।

डॉलर में फिर आएगी रैली

कैपिटल इकोनॉमिक्स के सीनियर मार्केट्स इकोनॉमिस्ट जोनस गोल्टरमैन ने एक नोट में कहा, “नवंबर में तेज गिरावट के बाद डॉलर में स्थिरता बनी हुई है। हम सोचते हैं कि ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती और रिस्क सेंटीमेंट बिगड़ने से 2023 की पहली छमाही में डॉलर में एक और रैली दिखेगी।”


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2023 की दूसरी छमाही में रुपया करेगा वापसी

Capital Economics के मुताबिक, हालांकि, 2023 की दूसरी छमाही में भारतीय करेंसी (Indian currency) के 80 के स्तर तक फिर वापसी करने का अनुमान है और 2024 के अंत तक यह 78 का स्तर देख सकती है।

अमेरिका में वित्तीय तंगी और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव से रुपया प्रभावित हुआ है, जिसने अधिकांश विकसित बाजारों और इमर्जिंग मार्केट्स की करेंसीज को पस्त कर दिया है।

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इस साल रुपये ने 83 का नया रिकॉर्ड लो बनाया है, लेकिन दूसरे देशों की तुलना में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा है। अभी तक ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती और करेंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) बढ़ने से करेंसी को झटका लग सकता है।

रिजर्व बैंक की है यह कोशिश

रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने कहा कि एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव को रोकने की कोशिशें जारी रहेंगी। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा, “रुपये का लचीलेपन और स्थिरता का इतिहास रहा है। हम एक्सचेंज रेट में उतार-चढ़ाव पर रोक लगाने के प्रयास करेंगे।”

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