आखिर क्यों गिर रहा है रुपया, इस साल अब तक 9.6% गिरने के बाद और कितना रुलायेगा रुपया

पिछले साल 21 अक्टूबर से अब तक 100 अरब डॉलर से ज्यादा हमारा फॉरेन रिजर्व खर्च हो चुका है और 650 अरब डॉलर से ज्यादा का रिजर्व घटकर अब सिर्फ 550 अरब डॉलर बचा है

अपडेटेड Sep 26, 2022 पर 5:20 PM
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डॉलर इंडेक्स 6 करेंसी को ट्रैक करता है और ये 114 पर पहुंच गया है जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड स्तर है। डॉलर इंडेक्स 20 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है

बाजार के फोकस में आज रुपया भी रहा जिसमें गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। रुपया आज फिर करीब 65 पैसे टूटा और साढ़े 81 के स्तर तक पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया एक डॉलर की कीमत 81 रुपए 58 पैसे तक पहुंची। जबकि डॉलर इंडेक्स में रिकॉर्ड उछाल का असर देखने को मिला। पिछले 3 दिनों में रुपया 1.70/ डॉलर लुढ़क गया। वहीं इस साल अब तक रुपया 9.6% तक गिर गया है।

आखिर क्यों गिर रहा है रुपया

क्यों गिर रहा है रुपया इसका कारण बताते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के नीरज वाजपेयी ने कहा कि रुपया गिरने का सबसे बड़ा कारण ये है कि दुनिया भर के देशों में ब्याज दरें बढ़ी हैं। वहीं अमेरिका में भी ब्याज दरें बढ़ी है और फेडरल रिजर्व का कहना है कि आगे भी ब्याज दरें बढ़ती रहेंगी। अब वहां पर 5 से 5.5 प्रतिशत तक की रेंज दी जा रही हैं। इसकी वजह से करेंसी लगातार दबाव में आ रही हैं। दुनिया भर की करेंसी के मुकाबले डॉलर मजबूत हो रहा है।


डॉलर इंडेक्स जो 6 करेंसी को ट्रैक करता है वह 114 पर पहुंच गया है। ये अपने आप में एक रिकॉर्ड स्तर है। डॉलर इंडेक्स 20 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसकी वजह से रुपये और दूसरी एशियन करेंसी में जबर्दस्त प्रेसर देखने को मिल रहा है। वहीं दूसरी तरफ डॉलर मजबूत होने से FPIs की तरफ से, तेल कंपनियों और इंपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की भारी मांग देखने को मिलती है। इससे डॉलर की कीमत रुपये की तुलना में ऊपर जाती है।

नीरज ने आगे कहा कि एक और कारण ये है कि डॉलर दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी मानी जाती है। इसे सबसे सेफ हैवेन माना जाता है। निवेश के लिए डॉलर सबसे सुरक्षित करेंसी भी मानी जाती है। इसलिए ज्यादा पैसा अमेरिका की तरफ जाता हुआ दिखाई दे रहा है। डॉलर इंडिया से निकल रहा है जिससे रुपया कमजोर हो रहा है।

नीरज वाजपेयी ने फॉरेन रिजर्व के आंकड़े बताते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 2021 से अब तक 100 अरब डॉलर से ज्यादा हमारा फॉरेन रिजर्व खर्च हो चुका है। जो रिजर्व हमारे पास 650 अरब डॉलर से ज्यादा था वह अब सिर्फ 550 अरब डॉलर बचा है। इसकी बहुत ज्यादा गुंजाइश भी नहीं है कि आरबीआई हस्तक्षेप करके करेंसी को संभालेगा। इसलिए इंपोर्ट करने वाली कंपनियों पर रुपये की कमजोरी की बड़ी मार पड़ रही है।

 

 

 

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