Rupee vs Dollar: अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का असर 17 सितंबर को रुपये पर दिखा। डॉलर के मुकाबले यह 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार हो गया। जुलाई के बाद पहली बार रुपया इस लेवल पर पहुंचा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 96.03 के लेवल पर चल रहा था। 16 सितंबर को यह 95.95 के लेवल पर बंद हुआ था।
फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट 0.25% बढ़ाया
अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने 16 सितंबर को इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान किया। फेड ने करीब तीन साल बाद इंटरेस्ट रेट 0.4 फीसदी बढ़ाया है। इतना ही नहीं फेड ने आगे भी सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दिया है। 25 बेसिस प्लाइंट्स बढ़ने के बाद अमेरिका में अब इंटरेस्ट रेट 3.75-4 फीसदी हो गया है।
फेड का फोकस महंगाई बढ़ने से रोकने पर
फेडरल रिजर्व की इंटरेस्ट रेट तय करने वाली कमेटी (FOMC) की बैठक 15 सितंबर को शुरू हुई थी। इसके नतीजे भारतीय समय के मुताबिक 16 सितंबर को रात करीब 12 बजे आए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड का फैसला अनुमान के मुताबिक रहा। पहले से यह माना जा रहा था कि 16 सितंबर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा करेगा। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने पहले कहा था कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर रहेगा।
क्रूड में उछाल से दुनियाभर में बढ़ी है महंगाई
फेड इस साल इंटरेस्ट रेट में और एक बार इजाफा कर सकता है। दरअसल, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से दुनियाभर में महंगाई बढ़ी है। इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए बैंक ऑफ जापान (BoJ) और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाने को मजबूर हुए हैं। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।
आरबीआई भी अगले महीने बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट
फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ा देने के बाद माना जा रहा है कि आरबीआई (RBI) भी अक्तूबर की अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 5 अक्तूबर को शुरू होगी। तीन दिन की बैठक के बाद इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे।
भारत में भी रिटेल इनफ्लेशन में लगातार बढ़ रहा
भारत में भी रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ रहा है। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन 4.80 से ऊपर निकल गया। यह आरबीआई के 4 फीसदी के तय लेवल से काफी ऊपर निकल चुका है। फेड के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का असर रुपया सहित भारतीय शेयर बाजार पर पड़ता है।