डॉलर के मुकाबले रुपए की सेहत जल्द सुधरने की उम्मीद नहीं, जानिए रायटर्स के पोल में एनालिस्ट्स ने क्या कहा

इस साल डॉलर के मुकाबले रुपए में अब तक 7 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। रुपए ने इस साल कई बार गिरावट के अपने ही रिकॉर्ड तोड़े। दूसरे देशों की करेंसी में भी डॉलर के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह इस साल डॉलर में आई जबर्दस्त मजबूती है

अपडेटेड Sep 07, 2022 पर 2:34 PM
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18 एनालिस्ट्स का कहना था कि हल्की रिकवरी के बावजूद रुपए के अगले छह महीने में गिरकर 80 के पार चले जाने का अनुमान है।

डॉलर के मुकाबले रुपए की सेहत जल्द सुधरने नहीं जा रही। अगले साल भी भी यह अपने सबसे निचले स्तर के आसपास बना रहेगा। इसकी वजह बिगड़ता व्यापार संतुलन (Trade Balance) और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की तरफ से इंटरेस्ट रेट में की जा रही वृद्धि है। रायटर्स के एक पोल में यह अनुमान जताया गया है।

इस साल डॉलर के मुकाबले रुपए में अब तक 7 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। रुपए ने इस साल कई बार गिरावट के अपने ही रिकॉर्ड तोड़े। दूसरे देशों की करेंसी में भी डॉलर के मुकाबले गिरावट देखने को मिली है। इसकी वजह इस साल डॉलर में आई जबर्दस्त मजबूती है।

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रायटर्स का यह पोल 1 से 6 सितंबर के बीच किया गया। इसमें 40 एनालिस्ट्स ने एक महीने में डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरकर 80 पर पहुंच जाने का अनुमान व्यक्त किया है। उनका कहना है कि रुपया इस नवंबर तक इस स्तर के करीब बना रह सकता है।

एनालिस्ट्स ने रुपये में कमजोरी जारी रहने की आशंका तब जताई है, जब RBI इसे गिरने से बचाने की कोशिश लगातार कर रहा है। वह इस साल मई से ही रुपए को सहारा देने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहा है।

अगले साल फरवरी के अंत तक रुपए के थोड़ी रिकवरी के बाद करीब 79.74 के स्तर पर रहने की उम्मीद है। अगस्त में इसके 78.50 के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन, 2 फीसदी की इस संभावित मजूबती से इस साल रुपए में आई 7 फीसदी गिरावट की भरपाई नहीं सकेगी।

इस पोल में शामिल 18 एनालिस्ट्स का कहना था कि हल्की रिकवरी के बावजूद रुपए के अगले छह महीने में गिरकर 80 के पार चले जाने का अनुमान है। यह रुपए का रिकॉर्ड लो लेवल पर होगा। वेल्स फार्गो सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट ब्रेंडन मैककेन ने कहा कि जब तक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का सिलसिला रोक नहीं देता और जब तक क्रूड में बड़ी गिरावट नहीं आती तब तक डॉलर के मुकाबले रुपया में गिरावट जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि रुपए सहित दूसरे उभरते देशों की करेंसी में गिरावट जारी रहने के आसार हैं। ये गिरकर ऑल-टाइम लो पर पहुंच सकते हैं। सुस्त पड़ती ग्रोथ और चीन में स्लोडाउन पर RBI की निगाहें बनी हुई हैं। अगले कुछ महीनों में स्थिति और खराब हो सकती है।

यह पूछने पर कि अगले तीन महीनों में रुपया का निचला स्तर क्या होगा, 19 एनालिस्ट्स ने कहा कि यह 81 तक जा सकता है। यह 80 से 83.34 के दायरे में बना रह सकता है। करीब तीन-चौथाई एनालिस्ट्स ने कहा कि अगले तीन महीनों में उभरते देशों की करेंसी में हल्की से बड़ी गिरावट आ सकती है।

जून तिमाही में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 13.5 फीसदी रही। यह बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में सबसे ज्यादा ग्रोथ है। लेकन, रुपए पर इसका खास असर नहीं पड़ा है। इसकी वजह यह है ज्यादा ग्रोथ की वजह बेस इफेक्ट है। क्रूड की ऊंची कीमतों और इनफ्लेशन में उछाल से रुपये में गिरावट जारी रहेगी।

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