Moody’s के इन्वेस्टर सर्विस ने गुरुवार को कहा है कि रूस पर लगाए गए अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रूसी ऑयल एंड गैस फिल्ड में बड़ी मात्रा में निवेश करने वाली कंपनियों को हानि (impairment losses) होगी और इनकी भावी कैश फ्लो जनरेशन क्षमता को झटका लगेगा।
ONGC,Oil India Ltd ,Indian Oil Corporation और Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) जैसे भारतीय कंपनियों ने रूस के अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस एसेट में भारी मात्रा में निवेश कर रखा है। मूडीज ने अपने एक नोट में कहा है कि रूस पर लागू इंपोर्ट बैन और अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण इन एसेट की नकद कमाई पर भारी मार पड़ेगी। जिसके चलते भारत की इन कंपनियों को भी अपने निवेश पर हानि (इम्पेयरमेंट लॉस) का सामना करना पड़ेगा।
बतातें चलें कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद BP और Shell जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों ने रूस से अपने कारोबार समेटने का एलान कर दिया है लेकिन भारतीय कंपनियों ने रूस से अपना निवेश निकालने का कोई एलान नहीं किया है।
मूडीज का कहना है कि भारतीय कंपनियों के इस रूख के चलते फिलहाल इन्वेस्टमेंट वैल्यू में सीमित हानि देखने को मिलेगी क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतें ऊपरी स्तर पर बनी हुई है। गौरतलब है कि भारतीय कंपनियों ने रूस के तेल और गैस क्षेत्र में 16 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर रखा है। भारतीय कंपनियों ने रूस के सुदुर-पूर्व स्थिति सखालिन वन (Sakhalin-1)ऑयल एंड गैस में बड़ी मात्रा में निवेश कर रखा है।
मूडीज का कहना है कि इन कंपनियों को डिविडेंड भुगतान हासिल करने में बाधा का सामना करना पड़ सकता है लेकिन इनकी कमाई पर बहुत बड़ा असर नहीं होगा। अगर SWIFT फाइनेंशियल मैसेजिंग सिस्टम से ज्यादा से ज्यादा रूसी बैंको को बाहर किया जाता है तो भारतीय कंपनियों को रूस में किए गए उनके अपस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट पर आगे मिलने वाले डिविडेंड को हासिल करने में मुश्किल हो सकती है।
मूडीज ने अपने नोट में यह भी कहा है कि भारतीय कंपनियों को डिविडेंड जैसा कैश फ्लो नहीं भी मिलता है तो उनके फाइनेशिंयल प्रोफाइल पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि अधिकांश कंपनियों के कंसोलिडेटड एबिटडा में रूस में किए गए निवेश से मिलने वाले डिविडेंड की हिस्सेदारी 5-6 फीसदी से भी कम होती है। हालांकि रूसी तेल पर अमेरिकी बैन और रूस पर लगाए गए तीसरे अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते रूसी ऑयल एंड गैस एसेट की कैश फ्लो जनरेशन क्षमता पर दबाव देखने को मिल सकता है। इस तरह की स्थिति में भारतीय कंपनियों के इन्वेस्टमेंट की वैल्यू कम होगी और इसका प्रभाव impairment losses के रुप में आएगा।
यह भी बतातें चलें कि 31 दिसंबर 2021 तक IOC और BPCL के कुल एसेट बेस में रशियन एसेट की हिस्सेदारी 5 फीसदी से कम थी। वहीं ONGC के कुल एसेट बेस में रशियन एसेट की हिस्सेदारी 12-20 फीसदी के आसपास है। ONGC के कंसोलिडेशन एबिटडा में वित्त वर्ष 2021 में रशियन एसेट की हिस्सेदारी करीब 11 फीसदी थी ।