इन दिनों ज्यादातर लोग अपने फोन को 1-2 साल में बदल लते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि पुराने फोन का क्या करें। घर पर पड़ा किसी काम का नहीं और किसी अनजान को बेचना भी ठीक नहीं। इन सबसे ऊपर महंगा फोन औने पौने दाम में बेचने का मन भी नहीं करता। इन्ही सारी दिक्कतों को समझा है स्टार्टअप कैशिफाई ने। आइए जानते है कैसे कैशिफाई ने पुराने फोन के दम पर खड़ा किया है नया बिजनेस मॉडल।
पुराना फोन हो या फिर लैपटॉप। इन्हें बेचना आसन नहीं होता। न सही कीमत मिलती है और अनजान हाथों में देने का सिरदर्द अलग। इस दिक्कत में एक मौका देखा तीन दोस्तों ने, और 2013 में मनदीप मनोचा, नकुल कुमार और अमित सेठी ने मिल कर शुरु किया कैशिफाई। तीनों के पास वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर में अच्छा अनुभव था और ये इस बिजनेस में उनके काफी काम आया।
कैशिफाई मुख्यतौर एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जहां पर टैबलेट, लैपटॉप, डेस्कटॉप और गेमिंग कंसोल बेचे जा सकते हैं। यहां पर आपको आपके पुराने डिवाइस की वाजिब कीमत के साथ साथ तुरंत पेमेंट भी मिलता है। इतना ही नहीं कैशिफाई ने कई शहरों में ऑफलाइन स्टोर्स भी खोले हैं जहां पर जाकर गैजेट्स को हाथों-हाथ बेचा जा सकता है। आज कैशिफाई की टीम 800 लोगों से ज्यादा की है, इनके पास 15 ऑफिस हैं और इनकी सर्विस 1000 से ज्यादा शहरों में मौजूद है। इतना ही नहीं Apple, Xiaomi, OnePlus, Vivo, Oppo, HP, Samsung और Dell जैसे ब्रांड्स के लिए Cashify बायबैक पार्टनर भी है।
लाखों पुराने फोन्स को रीफर्बिश कर चुकी Cashify को इन्वेस्टर्स से भी अच्छी मदद मिली है। अब तक कंपनी ढाई करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है। आज कैशिफाई की सालाना आय 600 करोड़ रुपए से ज्यादा है। Cashify का फोकस अब ऑफलाइन स्टोर्स को बढ़ाने पर है। फिलहाल कैशिफाई के 45 स्टोर्स हैं जिन्हे 200 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अलावा छोटे शहरों में विस्तार की योजना है जिससे मौजूदा रेवेन्यू को तीन गुना किया जा सके।