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फॉरेन क्लाइंट्स के सवालों को लेकर क्यों धर्मसंकट में पड़ जाते हैं निवेश सलाहकार सौरभ मुखर्जी?

मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और CIO सौरभ मुखर्जी का कहना है कि जब फॉरेन क्लाइंट्स उनसे यह पूछते हैं कि भारत में निवेश करने का सही समय क्या है, तो वे धर्मसंकट में पड़ जाते हैं। उन्होंने अपनी हालिया किताब 'बिहोल्ड द लेवाइथन' में भारतीय इकोनॉमी में हुए बड़े बदलाव के बारे में विस्तार से बात की है। मुखर्जी का कहना था कि अर्निंग में सुस्ती का सिलसिला अगली कुछ तिमाहियों में जारी रह सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 13, 2024 पर 9:08 PM
फॉरेन क्लाइंट्स के सवालों को लेकर क्यों धर्मसंकट में पड़ जाते हैं निवेश सलाहकार सौरभ मुखर्जी?
सौरभ मुखर्जी और नंदिता राजहंस अपनी नई किताब 'बिहोल्ड द लेवाइथन' के साथ।

Marcellus Investment Managers: मार्सेलस इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के फाउंडर और CIO सौरभ मुखर्जी का कहना है कि जब फॉरेन क्लाइंट्स उनसे यह पूछते हैं कि भारत में निवेश करने का सही समय क्या है, तो वे धर्मसंकट में पड़ जाते हैं। उन्होंने अपनी हालिया किताब 'बिहोल्ड द लेवाइथन' (Behold the Leviathan) में भारतीय इकोनॉमी में हुए बड़े बदलाव के बारे में विस्तार से बात की है। मुखर्जी ने कहा, 'हमारे पास हर हफ्ते कम से कम एक या दो फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स नियमित तौर पर आते हैं और वे भारत में निवेश को लेकर काफी उत्सुक रहते हैं। साथ ही, वे यह पूछते हैं कि भारत में खरीदारी का सही समय क्या है? यह सवाल हमें धर्मसंकट में डाल देता है।'

उनका कहना था कि अर्निंग ग्रोथ में सुस्ती और शेयर बाजार में करेक्शन के बावजूद मौजूदा अर्निंग मल्टीपल 23 गुना पर थोड़ा सा ज्यादा है। हालांकि, 17 गुना अर्निंग्स के ऐतिहासिक एवरेज और मौजूदा मल्टीपल्स के बीच निवेशक बाजार में अपना रास्ता निकाल लेंगे। मुखर्जी ने एक कार्यक्रम के मौके पर कहा, 'अर्निंग स्लोडाउन के अलावा कोई बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर पटरी पर है और बैकों की बैलेंस शीट मजबूत हैं।'

मुखर्जी का कहना था कि अर्निंग में सुस्ती का सिलसिला अगली कुछ तिमाहियों में जारी रह सकता है, जो इस बात का संकेत है कि यह गिरावट साइकल पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत में पिछले तीन साल से मजबूत अर्निंग ग्रोथ देखने को मिल रही है, लिहाजा थोड़ा सा स्लोडाउन स्वाभाविक है। मुखर्जी ने कहा कि कोविड 19 के बाद यह कॉरपोरेट अर्निंग में यह सबसे सुस्ती का दौर है।

मार्सेलस के सेल्स हेड प्रमोद गुब्बी का कहना था कि फॉरेन क्लाइंट्स से हुई बातचीत के आधार पर हम कह सकते हैं कि धीरे-धीरे भारतीय बाजार में उनकी दिलचस्पी में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उनकी चिंता वैल्यूएशंस को लेकर है। अगर बाजार में और 10 पर्सेंट का करेक्शन होता है, तो काफी लोग सही ट्रैक पर आ जाएंगे।

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