देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक पर बुलिश हैं विदेशी ब्रोकरेज, Q2 के बाद दिया 37% अपसाइड का टारगेट

Q2 FY27 नतीजों के बाद ज्यादातर ब्रोकरेज SBI पर पॉजिटिव हैं। CLSA ने 1,325 रुपये का टारगेट देकर 37% अपसाइड बताया है। मजबूत मार्जिन, लोन ग्रोथ और बेहतर एसेट क्वालिटी इसकी वजह हैं, लेकिन Bernstein और Nomura ने कमजोर कोर कमाई की तरफ ध्यान दिलाया है।

अपडेटेड Nov 04, 2026 पर 9:31 AM
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Q2 FY27 नतीजों के बाद ज्यादातर ब्रोकरेज SBI पर पॉजिटिव हैं।

Q2 FY27 के नतीजों के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) पर ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस का भरोसा कायम है। मजबूत नेट इंटरेस्ट मार्जिन, अच्छी लोन ग्रोथ और सुधरती एसेट क्वालिटी को देखते हुए CLSA, Citi, HSBC और Macquarie ने अपनी पॉजिटिव रेटिंग बरकरार रखी है। सबसे ऊंचा टारगेट CLSA का है, जिसने 1,325 रुपये का भाव देकर 37% का अपसाइड बताया है। छह ब्रोकरेज के टारगेट 1,100 रुपये से 1,325 रुपये के बीच हैं।

लेकिन तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। कुछ ब्रोकरेज ने कमजोर ऑपरेटिंग कमाई और रिपोर्टेड मुनाफे में एक्सेप्शनल गेन के योगदान की तरफ ध्यान दिलाया है। एक ब्रोकरेज का तो कहना है कि वन-ऑफ हटा दें, तो प्रति शेयर कमाई सालाना आधार पर सिर्फ 5% बढ़ी है।

नतीजों के बाद 1.7% फिसला शेयर, फिर भी 2026 में Nifty से बेहतर


तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद मंगलवार को SBI के शेयर पर दबाव दिखा। शेयर 1.7% टूटकर 970.25 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन की इस गिरावट से आगे बढ़कर पूरे साल का हिसाब देखें, तो कहानी बदल जाती है। 2026 में अब तक SBI का शेयर 1.5% नीचे है। इसी दौरान Nifty 50 में 8.9% की गिरावट आ चुकी है। मतलब, जिस साल बाजार का बड़ा इंडेक्स दबाव में रहा, उस साल SBI उससे कहीं कम फिसला। खबर में आगे ब्रोकरेज के टारगेट पर जो अपसाइड बताया गया है, वो इसी 970.25 रुपये के बंद भाव से निकाला गया है।

मुनाफा अनुमान से आगे

जुलाई से सितंबर की तिमाही में SBI का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.3% बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। CNBC-TV18 के पोल में 22,859 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान लगाया गया था और बैंक उससे आगे निकल गया। इस बढ़त में एक्सेप्शनल गेन का भी सहारा रहा। तिमाही के दौरान बैंक को 7,289 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल गेन हुआ, जबकि एक साल पहले यही रकम 4,593 करोड़ रुपये थी। दोनों के बीच 2,696 करोड़ रुपये का फर्क है।

ब्याज से होने वाली कमाई ने भी अच्छा साथ दिया। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 14.7% बढ़कर 49,143 करोड़ रुपये रही, जो अनुमान से बेहतर है। घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी पिछली तिमाही के मुकाबले 11 बेसिस प्वाइंट सुधरा और 3.11% पर आ गया। ब्रोकरेज की रिपोर्ट में बार-बार जिस मजबूत मार्जिन का जिक्र आया है, उसकी झलक इसी आंकड़े में दिखती है।

फंसे कर्ज का बोझ और हल्का हुआ

एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी बैंक ने राहत दी है। ग्रॉस NPA रेशियो पिछली तिमाही के 1.47% से घटकर 1.39% पर आ गया। इसे रुपये में सोचें, तो बैंक के हर 100 रुपये के कर्ज में से फंसी रकम 1.47 रुपये से घटकर 1.39 रुपये रह गई है। नेट NPA रेशियो भी 0.38% से घटकर 0.36% पर आ गया। ग्रॉस और नेट, दोनों आंकड़ों में एक साथ आई ये कमी बैंक की बैलेंस शीट के लिए अच्छा संकेत है। ब्रोकरेज ने अपनी पॉजिटिव राय की जो वजहें गिनाई हैं, उनमें सुधरती एसेट क्वालिटी भी शामिल है।

CLSA सबसे बुलिश, 1,325 रुपये का टारगेट

CLSA ने SBI पर आउटपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी है और 1,325 रुपये प्रति शेयर का टारगेट दिया है। ये मंगलवार के बंद भाव से 37% ऊपर है। ब्रोकरेज के मुताबिक NII अनुमान से 2% बेहतर रहा और इसमें मार्जिन बढ़ने से मदद मिली। लेकिन हर मोर्चे पर बात इतनी अच्छी नहीं रही। फीस से होने वाली कमाई कम रही और ट्रेजरी में नुकसान हुआ। इन दोनों की वजह से प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) अनुमान से 3% पीछे रह गया।

लोन ग्रोथ पर CLSA ने खास जोर दिया है। घरेलू लोन सालाना आधार पर 17% बढ़े हैं और ये ग्रोथ किसी एक हिस्से तक सिमटी नहीं, बल्कि हर तरफ फैली हुई है। डिपॉजिट में 12% की बढ़त रही। इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर आई नई गाइडलाइंस से भी CLSA ज्यादा परेशान नहीं दिखता। उसे उम्मीद है कि इनका असर सीमित रहेगा।

Citi का 1,300 रुपये का टारगेट

Citi ने बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,300 रुपये का टारगेट दिया है। मंगलवार के बंद भाव से ये 34% का अपसाइड है। ब्रोकरेज ने मजबूत मार्जिन और अच्छी एसेट क्वालिटी को अपनी राय का आधार बताया है।

Citi ने SBI के कर्ज से जुड़ी एक अहम बात सामने रखी है। बैंक के करीब 49% लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े हैं। यानी हर 100 रुपये के कर्ज में से करीब 49 रुपये ऐसे हैं, जिनकी ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क से बंधी है। Citi के मुताबिक, ब्याज दरें बढ़ने वाले माहौल में ये बात मार्जिन को सहारा देती है।

ECL यानी एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस पर शिफ्ट होने का असर भी Citi ने आंका है। उसके अनुमान के हिसाब से ये असर 19,500 करोड़ रुपये का होगा, जो बैंक की नेटवर्थ का 3.3% बैठता है। दूसरे शब्दों में, नेटवर्थ के हर 100 रुपये पर ये असर 3.3 रुपये का है।

HSBC ने घटाया टारगेट

HSBC ने बाय रेटिंग तो कायम रखी है, लेकिन टारगेट घटाकर 1,220 रुपये कर दिया है। मंगलवार के बंद भाव से ये 25.7% का अपसाइड है। टारगेट कम करने के पीछे HSBC ने दो वजहें गिनाई हैं। पहली, लोन ग्रोथ की धीमी रफ्तार। दूसरी, कुछ सब्सिडियरी कंपनियों के कम वैल्यूएशन मल्टीपल। पर इसी रिपोर्ट में एक उलटी तस्वीर भी है। HSBC ने FY27 से FY29 के लिए प्रति शेयर कमाई (EPS) के अनुमान 4 से 8% तक बढ़ा दिए हैं। इसके पीछे मार्जिन की मजबूत रफ्तार और ऑपरेटिंग लेवरेज को वजह बताया गया है। टारगेट नीचे आया, लेकिन कमाई के अनुमान ऊपर गए।

HSBC की तरह Macquarie ने भी 1,220 रुपये का टारगेट दिया है, पर उसकी रेटिंग आउटपरफॉर्म है। उसकी रिपोर्ट में तीन बातें उभरकर आती हैं, मजबूती से टिके मार्जिन, अच्छी एसेट क्वालिटी और ECL पर शिफ्ट होने की ऐसी लागत, जिसे संभाला जा सकता है। वैल्यूएशन को लेकर भी Macquarie सहज है। उसके मुताबिक SBI का शेयर FY28 की प्राइस-टू-बुक वैल्यू के 1.3 गुना पर है और ये वैल्यूएशन उसे ठीक लगते हैं।

Bernstein और Nomura सतर्क, कोर कमाई पर जताई चिंता

सभी ब्रोकरेज एक सुर में नहीं बोल रहे। Bernstein ने मार्केट परफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है और 1,300 रुपये का टारगेट दिया है, जो मंगलवार के बंद भाव से 34% ऊपर है। Bernstein की नजर मुनाफे की बनावट पर है। उसका कहना है कि हेडलाइन प्रॉफिट ग्रोथ को दो चीजों से सहारा मिला, कम क्रेडिट कॉस्ट और हिस्सेदारी बेचने से हुई कमाई।

Bernstein के मुताबिक बैंक का अंदरूनी प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर घटा है, क्योंकि अदर इनकम कमजोर रही और खर्च बढ़े। उसकी रिपोर्ट की सबसे चुभने वाली बात यही है कि वन-ऑफ यानी एक बार की कमाई को हटा दें, तो EPS सालाना आधार पर सिर्फ 5% बढ़ा है। कागज पर मुनाफा 14.3% बढ़ा दिखता है, पर एक बार की कमाई को अलग करते ही ग्रोथ की रफ्तार काफी धीमी नजर आती है।

Nomura ने न्यूट्रल रेटिंग के साथ 1,100 रुपये का टारगेट दिया है। छह ब्रोकरेज में ये सबसे कम टारगेट है और मंगलवार के बंद भाव से 13.4% ऊपर है। Nomura का कहना है कि बैंक का कोर प्रदर्शन अनुमान के हिसाब से ही रहा। लेकिन ऑपरेटिंग खर्च बढ़ने और अदर इनकम घटने से ऑपरेटिंग कमाई पर दबाव आया।

मैनेजमेंट को भरोसा, 14-15% क्रेडिट ग्रोथ और 3% से ऊपर NIM

ब्रोकरेज की राय भले अलग-अलग हो, SBI मैनेजमेंट अपने अनुमान पर टिका है। बैंक ने FY27 के लिए 14-15% क्रेडिट ग्रोथ की गाइडेंस बरकरार रखी है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3% से ऊपर बना रहेगा। लोन ग्रोथ और मार्जिन, यही वो दो चीजें हैं जिन्हें ज्यादातर ब्रोकरेज ने अपनी पॉजिटिव राय की वजह बताया है। ऐसे में मैनेजमेंट का ये भरोसा उन ब्रोकरेज की सोच से मेल खाता है, जो SBI पर बुलिश बने हुए हैं।

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