State Bank of India (SBI) के शेयरों में इनवेस्टर्स की ऐसी दिलचस्पी शायद ही पहले कभी देखने को मिली हो। बीते तीन महीनों में यह शेयर 15 फीसदी चढ़ चुका है। इसने न सिर्फ मार्केट के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है बल्कि कई प्रतिद्वंद्वी बैंकों के शेयरों को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके पीछे ठोस वजहें हैं।
अब इनवेस्टर्स यह समझने लगे हैं कि देश का सबसे बड़ा बैंक आखिरकार बैड लोन के जाल से बाहर निकल रहा है। यह पूरी रफ्तार से कर्ज दे रहा है। तेज ग्रोथ को देखते हुए SBI को पूंजी की जरूरत है। एनालिस्ट्स का कहना है कि ग्रोथ के नेक्स्ट स्टेज में पहुंचने के साथ ही इसके शेयरों की दोबारा रेटिंग होगी।
करीब सभी ब्रोकरेज फर्मों ने एसबीआई के शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। इनमें से ज्यादातर पिछले दो साल में इस स्टॉक की रिरेटिंग कर चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में शेयरों में आई तेजी के बावजूद इसमें एक महीने की फॉरवर्ड बुक वैल्यू के सिर्फ 1.5 गुना पर कारोबार हो रहा है।
ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर के एनालिस्ट गौरव जानी ने कहा, "एसबीआई के शेयरों पर ज्यादातर पॉजिटिव खबरों का असर पड़ चुका है। इसके बावजूद शेयरों में जान बाकी है।" इससे पता चलता है कि आगे भी इस शेयर की वैल्यूएशन बढ़ने और रफ्तार तेज बने रहने की उम्मीद है।
SBI का कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो सितंबर में 13.51 फीसदी था। यह 12 फीसदी के रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट से ज्यादा है। साथ ही एक साल पहले के 13.35 फीसदी से भी थोड़ा अधिक है। बैंक के बैड लोन में बड़ी गिरावट आई है। इस वजह से इसे कम प्रोविजनिंग करनी पड़ी है। इसने बॉन्ड मार्केट से पूंजी भी जुटाई है।
देश के सबसे बड़े बैंक की तिमाही प्रॉफिट ग्रोथ अच्छी रही है। हालांकि, कैपिटल रेशियो में मामूली वृद्धि से पता चलता है कि क्रेडिट ग्रोथ की वजह से बैंक का ज्यादातर आंतरिक संसाधन खर्च हो गया है। बैंक के चेयरमैन दिनेश खारा ने लोन ग्रोथ आगे भी मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई है। हालांकि, यह इकोनॉमिक ग्रोथ पर निर्भर करेगा। उन्होंने इस फाइनेंशियल ईयर में लोन ग्रोथ 16 फीसदी तक रहने की उम्मीद जताई है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि SBI के लिए पूंजी जुटाना जरूरी है। ब्रोकरेज फर्म JM Financial के एनालिस्ट्स का कहना है कि बैंक को अगले दो साल में पूंजी जुटानी पड़ेगी। यह पूंजी टियर-1 होनी चाहिए, क्योंकि बैंक का कॉमन इक्विटी टियर-1 कैपिटल रेशियो 9.53 फीसदी है। इसके लिए मिनिमम लिमिट 8.6 फीसदी है।
जेएम फाइनेंशियल के एनालिस्ट्स ने कहा, "एसबीआई को जहां अगले 12-24 महीनों में इक्विटी कैपिटल जुटाने की जरूरत है वही सब्सिडियरी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचना पूंजी जुटाने का दूसरा विकल्प हो सकता है।" लेकिन, खारा ने सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बेचने के बारे में कहा कि एसबीआई म्यूचुअल फंड की लिस्टिंग का प्लान बन रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि इस कंपनी का आईपीओ कब आएगा।