SEBI चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने कहा है कि IPO से पहले ग्रे मार्केट में गतिविधियां बढ़ना चिंता की बड़ी वजह है, लेकिन यह एक पेचीदा (Complicated) समस्या है। कानून के तहत हमें कुछ खास अधिकार हासिल है, लेकिन ये कानून लिस्टेड कंपनियों और लिस्टेड होने जा रही कंपनियों पर लागू होते हैं। कानून के तहत लिस्टेड होने जा रही कंपनी का मतलब ऐसी कंपनी से है, जिसने खुद को लिस्ट कराने के लिए औपचारिक प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि यह एक नाजुक मामला है, जिसमें कंसल्टेशन पेपर पेश किए बगैर हम नहीं जाना चाहेंगे। मार्केट में लगातार आईपीओ आ रहे हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियों के प्रमोटर्स और प्राइवेट इवेस्टर्स आईपीओ में तय शेयर की कीमत को सही साबित करने के लिए ग्रे मार्केट में कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
ग्रे मार्केट में स्टॉक की कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रहे प्रमोटर्स
इनवेस्टर्स ग्रे मार्केट में स्टॉक की कीमत से उसमें डिमांड का अंदाजा लगाते हैं। इससे वे यह भी अनुमान लगाते हैं कि स्टॉक में निवेश करने पर लिस्टिंग गेंस की कितनी संभावना है। कंपनियों के आईपीओ में कीमत ज्यादा तय करने की यह एक बड़ी वजह है। बुच ने 11 मार्च को महिला पत्रकारों से बातचीत में इसे बड़ी चिंता बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सेटलमेंट टाइम को T+6 से घटाकर T+3 करने का मकसद कर्ब ट्रेडिंग में कमी लाना था। उन्होंने कहा कि ग्रे मार्केट को छह दिन तक ऑपरेट करने की इजाजत क्यों दी जाए। इस पीरियड को घटाने से रेगुलेटेड मार्केट में ट्रेडिंग जल्द शुरू हो गई।
किसी चीज को रोकने की जगह उसके लिए जगह बनाना सही है
उन्होंने कहा कि रेगुलेटर का मानना है कि किसी चीज को पूरी तरह से रोकने की जगह जरूरत के हिसाब से उसके लिए मार्केट में जगह बनाना सही है। उन्होंने कहा, "अगर इनवेस्टर्स चाहते हैं तो हमारा मानना है कि उस पर रोक लगाने की जगह क्यों नहीं उसे रेगुलेटेड मार्केट का हिस्सा (सही रिस्क मैनेजमेंट के साथ) बनाया जाए। हमने यही सोच स्मॉल और मीडियम REITs के मामले में अपनाया है और हम PMS और MFs के बीच एक नया एसेट क्लास बना रहे हैं।"
दुनियाभर में प्राइवेट मार्केट के प्रभावित करने की समस्या
पब्लिक मार्केट पर प्राइवेट मार्केट के पड़ने वाले असर के मसले पर बुच ने कहा कि यह एक ऐसी समस्या हैं, जो दुनियाभर में दिख रही है। जब कभी आपस में जुड़े होने की बात आती है हमें इसके बारे में सोचने की जरूरत होती है।
यह भी पढ़ें: SEBI चेयरपर्सन की टिप्पणी के बाद SME IPO स्टॉक्स में रही तेज गिरावट