SEBI चीफ की IPO निवेशकों को बड़ी सलाह: 'लिस्टिंग गेन' का लालच है खतरनाक, लंबी अवधि का नजरिया अपनाए

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किसी भी आईपीओ (IPO) का मूल्यांकन केवल लिस्टिंग के दिन होने वाले मुनाफे यानी ‘लिस्टिंग पॉप’ के आधार पर न करें। उन्होंने साफ किया कि शेयर बाजार में निवेश का आकलन लंबी अवधि के प्रदर्शन से होना चाहिए, न कि एक दिन के उतार-चढ़ाव से

अपडेटेड Mar 02, 2026 पर 4:31 PM
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तुहिन कांत पांडे, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंड बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे किसी भी आईपीओ (IPO) का मूल्यांकन केवल लिस्टिंग के दिन होने वाले मुनाफे यानी ‘लिस्टिंग पॉप’ के आधार पर न करें। उन्होंने साफ किया कि शेयर बाजार में निवेश का आकलन लंबी अवधि के प्रदर्शन से होना चाहिए, न कि एक दिन के उतार-चढ़ाव से।

“एक दिन के लिए शेयरधारक मत बनिए”

मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में पांडेय ने कहा, “अगर आप केवल लिस्टिंग पॉप के नजरिये से देख रहे हैं, तो यह बाजार की सही सोच नहीं है। जब आप किसी ऐसी कंपनी में निवेश कर रहे हैं जो लंबे समय तक काम करेगी, तो आप सिर्फ एक दिन के लिए शेयरधारक नहीं बनना चाहेंगे।”

उनका कहना था कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और यह किसी के नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए निवेशकों को धैर्य और लॉन्ग-टर्म नजरिए के साथ निवेश करना चाहिए।


IPO इकोसिस्टम पर भरोसा जताया

SEBI चीफ ने कहा कि भारत का IPO इकोसिस्टम मजबूत डिस्क्लोजर (खुलासों) पर आधारित है, जिससे निवेशक खुद वैल्यूएशन और बिजनेस मॉडल का आकलन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) और रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जैसे दस्तावेजों में तुलनात्मक आंकड़े और विस्तृत जानकारियां मौजूद होती हैं। इससे संस्थागत और एंकर निवेशकों को समझदारी से फैसला लेने में मदद मिलती है।

IPO की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर पांडेय ने कहा, “हमें किसी एक उदाहरण के आधार पर पूरे बाजार को आंकना नहीं चाहिए। हमारा बाजार मजबूत है और खुलासों से परिपूर्ण है।”

OFS बनाम फ्रेश इश्यू: संतुलन सामान्य स्तर पर

हाल के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) के बढ़ते हिस्से को लेकर भी सवाल उठे हैं। इस पर पांडेय ने कहा कि सेबी की एनालिसिस के मुताबिक, यह अनुपात अब सामान्य स्तर पर आ गया है। उन्होंने बताया कि हालिया आईपीओ में औसतन लगभग 55% हिस्सा OFS का और 45% हिस्सा फ्रेश कैपिटल का रहा है, जो ऐतिहासिक रुझानों के मुताबिक है। साल 2020 में OFS का हिस्सा करीब 87% तक पहुंच गया था।

फंड के दुरुपयोग पर निगरानी मजबूत

IPO के दौरान कंपनियों की ओर से जुटाए गए फंड के दुरुपयोग को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। इस पर सेबी चेयरमैन ने कहा कि निगरानी तंत्र लगातार मजबूत किया जा रहा है, खासकर SME सेगमेंट में, जहां एक्सचेंजों ने सख्ती बढ़ाई है।

उन्होंने कहा कि एक ओर लोग अत्यधिक निगरानी की आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता और नियंत्रण की मांग भी करते हैं। ऐसे में संतुलित और विकसित होती सिस्टम पर काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की जा सकती है।

LODR नियमों की व्यापक समीक्षा

सेबी चीफ ने बताया कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों की व्यापक समीक्षा जारी है। इस समीक्षा के माध्यम से खुलासों और निगरानी के मानकों को और बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।

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