SME Shares: छोटी और मंझले आकार की कंपनियों (SME) के शेयरों की रॉकेट स्पीड पर अब बाजार नियामक सेबी (SEBI) की निगरानी बढ़ गई है। सेबी ने इन शेयरों को अब शॉर्ट टर्म एडीशनल सर्विलांस मेजर (ASM) और ट्रेड-टू-ट्रेड (T2T) सेटलमेंट फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है। एक्सचेंजों की तरफ जारी सर्कुलर से इसका खुलासा हुआ है। संशोधित फ्रेमवर्क 3 अक्टूबर को जारी कर दिया जाएगा। एक्सचेंजों की तरफ से जारी सर्कुलर के मुताबिक उनके और बाजार नियामक सेबी के बीच ज्वाइंट सर्विलांस मीटिंग में इससे जुड़ा फैसला लिया गया। बैठक में फैसला लिया गया कि शॉर्ट टर्म ASM फ्रेमवर्क और T2T फ्रेमवर्क में कुछ बदलावों के बाद SME शेयरों को भी इसके तहत लाया जाएगा।
SEBI ने क्यों किया ऐसा फैसला
SME के शेयरों में पिछले कुछ समय से खुदरा निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। इनके IPOs में खुदरा निवेशक तेजी से पैसे लगा रहे हैं। सेबी को इस बात की चिंता है कि इस सेगमेंट में शेयरों की कीमतों में मनमानी उतार-चढ़ाव को लेकर हेराफेरी हो सकती है। SME सेगमेंट में अभी कंप्लॉयंस की जरूरतें और नियामकीय निगरानी कम है, इसके अलावा मार्केट कैप और इक्विटी भी कम है तो मैनुपिलेशन की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा SME के IPOs को सेबी की बजाय एक्सचेंजों की मंजूरी से लाया जा सकता है। ऐसे में खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी ने इन्हें भी शॉर्ट टर्म एएसएम और टी2टी फ्रेमवर्क के तहत लाने का फैसला किया है।
SME IPO में खुदरा निवेशक लगा रहे जमकर पैसा
छोटी और मंझले आकार वाली कंपनियों के आईपीओ में खुदरा निवेशक कितना पैसा लगा रहे हैं, इसका अंदाजा इस साल अब तक आए मेनबोर्ड और SME के आईपीओ में सबसे अधिक जिस इश्यू को लेकर खुदरा निवेशकों का क्रेज रहा, उसके बीच के अंतर से समझ सकते हैं। मेनबोर्ड यानी बीएसई और एनएसई पर लिस्टिंग के लिए आइडियाफोर्ड टेक के आईपीओ में इस साल खुदरा निवेशकों ने सबसे अधिक पैसा लगाया जिसमें उनके लिए आरक्षित हिस्सा 85.20 गुना भरा था। वहीं दूसरी तरफ SME Segment में इस साल सबसे अधिक कहन पैकेजिंग का आईपीओ खुदरा निवेशकों को भाया और इसका खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1042.37 गुना भरा था।