मार्केट रेग्यूलेटर सेबी ने REITs और InvITs जैसे निवेश विकल्पों के स्पांसर्स (प्रायोजकों) की उच्च जिम्मेदारी से संबंधित प्रस्ताव पर सार्वजनिक राय पेश करने की समय सीमा 15 मार्च तक बढ़ा दी है। सेबी ने 23 फरवरी को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) में स्पांसर्स की होल्डिंग पर एक कंसल्टेशन पेपर रखा था और 8 मार्च तक इस सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी थीं।
अब सेबी ने एक सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा “इस मुद्दे पर सार्वजनिक राय पेश करने की समयसीमा को बढ़ाकर 15 मार्च, 2023 करने का फैसला किया गया है।”
सेबी ने REITs और InvITs के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा
अपने कंसल्टेशन पेपर में, सेबी ने REITs और InvITs के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के तहत InvITs और REITs में इनके प्रायोजकों को एक निश्चित प्रतिशत यूनिटों की धारिता रखनी होगी। सेबी ने ये कंसल्टेशन पेपर जारी करते हुए कहा ती कि REITs और InvITs यूनिट धारकों के हितों की रक्षा करने और इनमें प्रायोजक की अनुपस्थिति से जुड़ी ठांचागत कमजोरियों को दूर करने के लिए ये संशोधन प्रस्तावित किए जा रहे हैं।
सेबी ने सिफारिश की है कि REITs/InvITs के प्रायोजकों को लिस्टिंग तिथि से तीन साल की अवधि तक इन निवेश विकल्पों की कुल पूंजी की कम से कम 15 फीसदी हिस्सा रखनी चाहिए। इस अवधि के बाद, कोई अनिवार्य यूनिट होल्डिंग की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, प्रायोजकों को तीन से पांच साल के बाद इकाई पूंजी का 5 फीसदी, पांच से दस साल के लिए 3 फीसदी, दस से बीस साल के लिए 2 फीसदी और बीस साल के बाद 1 फीसदी हिस्सेदारी रखने की जरूरत होगी।
सेबी के मुताबिक भारत में REIT/InvIT के जरिए होने वाला निवेश अपने प्रारंभिक अवस्था में है और लगातार विकसित हो रहा है। इस इनवेस्टमेंट मैनेजर के पूरे जीवन काल में कम से कम एक प्रायोजक होने की आवश्यकता है। REITs और InvITs भारतीय में अपेक्षाकृत नए निवेश साधन हैं लेकिन ग्लोबल बाजारों में ये बेहद लोकप्रिय हैं।