कार्वी घोटाला मामले में लापरवाही दिखाने के लिए सेबी ने BSE और NSE पर लगाया जुर्माना

बता दें कि इस ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर घोटाला है

अपडेटेड Apr 13, 2022 पर 8:43 AM
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सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं

सेबी ने मंगलवार की रात कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड (Karvy Stock Broking Ltd) घोटाला मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में BSE पर 3 करोड़ और NSE पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबी ने कहा है कि NSE और BSE ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग की तरफ से ग्राहकों की सिक्योरिटीज के गलत उपयोग को रोकने के लिए सही समय पर कोई कदम नहीं उठाया और मामले की जांच में ढ़िलाई बरती। जिसकी वजह से ये जुर्माना लगाया जा रहा है। सेबी के इस ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि एक्सचेंजों ने पिछले सालों के दौरान ब्रोकर यानी कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग की गतिविधियों की जांच में सुस्ती दिखाई है।

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जानिए क्या है मामला


बता दें कि इस ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर घोटाला है। सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं। यानी कार्वी ने क्लाइएंट्स की सिक्युरिटीज बेच दी थी। इस बिक्री से उसे जो रकम हासिल हुई थी, उसे उसने कार्वी रियल्टी लिमिटेड जैसे रिलेटेड पार्टी बिजनेसेज में ट्रांसफर कर दिया था। सेबी ने अपनी जांच के प्रारंभिक निष्कर्ष में कहा था कि ब्रोकरेज कंपनी ने क्लाइएंट की सिक्युरिटीज का दुरुपयोग किया, इनका अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया और ऐसे ट्र्रेड में शामिल हुआ, जिसकी अनुमति उसे नहीं दी गई थी। मामला सामने आने के बाद सेबी ने तुरंत प्रभाव से कंपनी को शेयर ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए नए ग्राहकों जोड़ने पर रोक लगा दी थी।

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